दिल्ली बम धमाके और फरीदाबाद में मिले 2921 किलो विस्फोटक समेत आतंक की पूरी कहानी अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 के कमरा नंबर 13 में रची जा रही थी। तीसरी मंजिल पर स्थित ये कमरा यहां कार्यरत डॉ. मुज्जमिल अहमद गनेई उर्फ मुसैब को अलॉट था। इसके बगल वाला कमरा दिल्ली धमाके में शामिल डॉ. उमर को अलॉट था, लेकिन उमर अपना कमरा छोड़कर मुज्जमिल के साथ ही रहता था।
2 of 5
अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग
– फोटो : अमर उजाला
अच्छे दोस्त थे दोनों
यूनिवर्सिटी के सूत्रों ने बताया कि दोनों बीते कई महीनों से काफी अच्छे दोस्त थे। वे यूनिवर्सिटी परिसर में अधिकतर समय एक साथ बिताते थे और एक-दूसरे से ही चर्चाओं का दौर रखते थे। इनके कई अन्य दोस्त भी थे जो अक्सर इनके साथ देखे जाते रहे हैं।
3 of 5
अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग
– फोटो : अमर उजाला
तीन महीने से आतंकी संगठनों के संपर्क में थे
जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो दोनों बीते लगभग तीन महीने से आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अंसर गजावत-उल-हिंद के पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे। वे अक्सर अपने हैंडलर से बात करते थे। इसके चलते दोनों ही एक कमरे में अधिकतर समय रहते थे।
4 of 5
अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17
– फोटो : अमर उजाला
एटीएस ने पांच घंटे की पूछताछ
यूनिवर्सिटी के सूत्र ने बताया कि सोमवार को एटीएस टीम ने लगभग 5 घंटे तक यूनिवर्सिटी परिसर में पूछताछ की। कार में सवार होकर एटीएस के कई लोगों की टीम यहां पहुंची। पहले ये सादे कपड़ों में थे और इनके साथ एक महिला भी थी। लगभग 2 घंटे तक इन्होंने यूनिवर्सिटी के छात्रों व स्टॉफ से बातचीत करने के साथ ही पूछताछ भी की।
5 of 5
अल फलाह यूनिवर्सिटी
– फोटो : अमर उजाला
ली गई दोनों के कमरे की तलाशी
इसमें सभी ने डॉ. मुज्जमिल और उसके साथियों के बारे में पूछा। बाद में टीम ने अपनी एटीएस की जैकेट पहनी और फिर तीसरी मंजिल पर डॉ. मुज्जमिल व उमर के कमरे का दरवाजा तोड़कर उसकी तलाशी ली। यहां टीम ने लगभग ढाई घंटे तक सामान खंगाला। इस दौरान यहां से काफी सामान टीम ने जब्त भी किया है। टीम ने यहां से जाने के दौरान भी छात्रों व स्टॉफ को कहा कि पूछताछ में आप लोगों को सहयोग करना है ताकि अपराधी बच न सकें और बेकसूर लोगों को कोई परेशानी न हो।



