सुपौल की हवा में अब चुनावी रंग घुल चुका है। खेतों की सरसराहट से लेकर चौपालों की गूंज तक, हर ओर राजनीति की नई कहानी लिखी जा रही है। यहां के लोग केवल मतदाता नहीं, बल्कि सत्ता की दिशा तय करने वाले विचारक बन चुके हैं। अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ जब सुपौल पहुंचा, तो लगा मानो पूरा जिला लोकतंत्र के उत्सव में डूब गया हो, कहीं तर्क, कहीं तकरार और हर दिल में वही सवाल गूंजता हुआ, “किसे मिलेगी इस बार सत्ता की चाबी?”
स्थानीय निवासी संदीप कुमार झा ने कहा, “हमारे इलाके में विधायक ने बहुत अच्छा विकास किया है। इतना विकास शायद किसी और क्षेत्र में नहीं हुआ होगा। गांधी मैदान में लोग आराम से छठ पूजा मना पा रहे हैं, यह भी हमारे विधायक की मेहनत का नतीजा है।”
मोहम्मद नरुल अंसारी ने बताया, “विपक्ष हमेशा पलायन और नौकरी की बात करता है, लेकिन सबसे ज्यादा नौकरियां तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही दी हैं। उन्होंने गांधी मैदान में लाखों लोगों को एक साथ नौकरी दी थी।” उन्होंने आगे कहा, “विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं है, बस पलायन की बात दोहराता रहता है।”
कृष्णा यादव ने कहा, “सुपौल में अब कोई बड़ी समस्या नहीं है। यहां जो भी विकास हुआ है, उसके लिए हम नीतीश कुमार को ही वोट देंगे।” उन्होंने यह भी बताया, “नीतीश कुमार लगातार युवाओं की मदद कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं को 10 लाख रुपये की सहायता दी है। मुझे भी इसका फायदा मिला है, अब मैं अपनी दुकान चला रहा हूं।”
भरत कुमार ने कहा, “सुपौल में बहुत विकास हुआ है। विजेंद्र प्रसाद यादव ने यहां काफी काम किया है। लोग उनकी तुलना भगवान विश्वकर्मा से करते हैं क्योंकि उन्होंने क्षेत्र को नई पहचान दी है।” माधव झा ने कहा, “सुपौल में विकास तो हुआ है, लेकिन बिहार में अभी भी इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है। मेरे पास अच्छी पढ़ाई-लिखाई है, फिर भी मुझे बिहार में नौकरी नहीं मिल रही, क्योंकि यहां कोई बड़ी कंपनी (MNC) नहीं है। इसी वजह से मुझे गुरुग्राम और नोएडा जाना पड़ता है। बिहार सरकार को इस दिशा में जरूर ध्यान देना चाहिए।”
राजकुमार ने कहा, “इस बार हम सरकार बदलना चाहते हैं। इस बार हम तेजस्वी यादव को मौका देंगे। पिछले 20 वर्षोंसे कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ हैइसलिए अब हम परिवर्तन लाना चाहते हैं ताकि कुछ नया बदलाव आ सके।”



