Monday, January 12, 2026
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Bihar News: सिविल सर्जन के निर्देश भी बेअसर, समस्तीपुर सदर अस्पताल में मनमानी जारी; जानें क्या है मामला?

समस्तीपुर सदर अस्पताल में डॉक्टरों की ड्यूटी में लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। तय रोस्टर के बावजूद कई नियमित डॉक्टर इमरजेंसी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं, जिससे मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चार डॉक्टरों ने अब तक अपने स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया है, जबकि नियमों के अनुसार 24 घंटे के भीतर जवाब देना अनिवार्य था।

सदर अस्पताल में ड्यूटी में लापरवाही को लेकर अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। रोस्टर उल्लंघन का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने पांच डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा था। जांच में सामने आया कि अब तक केवल डॉ. संतोष झा ने ही अपने स्पष्टीकरण का जवाब दिया है, जिसे सिविल सर्जन कार्यालय को भेज दिया गया है।

उपाधीक्षक (डीएस) डॉ. गिरीश कुमार के अनुसार, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. उत्सव कुमार और डॉ. एन.के. चौधरी ने अब तक स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया है। जबकि सभी डॉक्टरों को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया था। एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद जवाब न आना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। डीएस ने बताया कि बुधवार को संबंधित डॉक्टरों को दोबारा नोटिस भेजा जाएगा।

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इधर, बुधवार को एक बार फिर रोस्टर की अनदेखी करते हुए डॉ. संतोष झा इमरजेंसी वार्ड में किसी अन्य डॉक्टर की जगह ड्यूटी करते पाए गए। जबकि अपने स्पष्टीकरण में डॉ. संतोष झा ने यह लिखित रूप से कहा था कि वे आगे किसी अन्य डॉक्टर की जगह ड्यूटी नहीं करेंगे। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन की जानकारी में यह स्थिति बनी रही।

सूत्रों के अनुसार, कुछ डॉक्टर कार्यालय से समन्वय कर सदर अस्पताल की ड्यूटी छोड़कर निजी अस्पतालों में कार्यरत हैं और अपनी जगह अन्य डॉक्टरों से ड्यूटी करवा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे मामलों में उपस्थिति भी दर्ज की जा रही है।

जब इस विषय में उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार से उपस्थिति पंजी के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि संबंधित डॉक्टरों का एक-एक दिन का वेतन काटते हुए उन्हें अनुपस्थित दर्ज किया गया है। हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक रोस्टर व्यवस्था को सख्ती से लागू करने या ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।

गौरतलब है कि डॉ. संतोष झा पर पहले भी लगातार 30 घंटे तक इमरजेंसी ड्यूटी करने का आरोप लग चुका है, जो इमरजेंसी सेवा प्रोटोकॉल और रोस्टर नियमों का उल्लंघन है। इस मामले में कार्रवाई के बजाय अस्पताल प्रबंधन पर लीपापोती के आरोप लग रहे हैं।

वहीं, सिविल सर्जन डॉ. एस.के. चौधरी ने उपाधीक्षक को सख्त निर्देश दिया था कि इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी केवल रोस्टर के अनुसार ही कराई जाए। बावजूद इसके, एक बार फिर उन्हीं निर्देशों की अनदेखी करते हुए डॉ. संतोष झा से लगातार अन्य डॉक्टरों की जगह ड्यूटी कराई जा रही है।

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