Saturday, January 31, 2026
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Bihar Election: तेजप्रताप ने RJD के पारंपरिक सीट पर उतारा कैंडिडेट, तेजस्वी की बढ़ी मुश्किलें!

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मधेपुरा जिले की राजनीति इस बार बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुकी है। जिले की चार विधानसभा सीटों में से एक मधेपुरा सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय ही नहीं, बल्कि बहुकोणीय होने जा रहा है। यह सीट पारंपरिक रूप से राजद का गढ़ मानी जाती रही है, जहां आजादी के बाद से अब तक कोई भी गैर-यादव उम्मीदवार विधायक नहीं बना है। 2010 से अब तक राजद ने इस सीट पर लगातार अपना कब्जा बनाए रखा है।

तेजप्रताप यादव ने उतारा संजय यादव को मैदान में

जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने इस बार मधेपुरा सीट से संजय यादव को प्रत्याशी बनाकर बड़ा दांव खेला है। तेजप्रताप ने 13 अक्टूबर को अपने प्रत्याशी के रूप में उन्हें पार्टी का सिंबल प्रदान किया। संजय यादव, जो मधेपुरा सदर प्रखंड के मानिकपुर पंचायत के 15 वर्षों तक सरपंच रहे हैं, वर्तमान में उनकी पत्नी भी सरपंच हैं। वे लंबे समय से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, लेकिन आखिरकार तेजप्रताप की पार्टी से मैदान में उतरने का निर्णय लिया। गुरुवार को उन्होंने नामांकन दाखिल कर दिया।

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यादव मतों में बंटवारे की आशंका

इस सीट पर इस बार कई दलों ने यादव समुदाय के उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे यादव मतों के बंटवारे की संभावना बढ़ गई है। जन सुराज पार्टी ने गम्हरिया प्रखंड प्रमुख शशि कुमार यादव को प्रत्याशी बनाया है, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) ने साहुगढ़ पंचायत के मुखिया मुकेश कुमार यादव को टिकट दिया है। इससे मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है।

राजद ने चौथी बार प्रो. चंद्रशेखर पर जताया भरोसा

राजद ने इस बार भी अपने पुराने और मजबूत प्रत्याशी प्रोफेसर चंद्रशेखर यादव पर भरोसा जताया है। वे लगातार तीन बार से इस सीट से विधायक हैं और चौथी बार टिकट पाकर अब भी सबसे मजबूत दावेदारों में गिने जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, जदयू ने इस सीट पर नया राजनीतिक प्रयोग किया है। पार्टी ने तेली समाज से आने वाली कविता कुमारी साहा को टिकट देकर जातीय समीकरण को चुनौती देने की रणनीति अपनाई है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, जदयू का यह कदम पारंपरिक यादव वर्चस्व को तोड़ने की सोची-समझी चाल मानी जा रही है।

गौरतलब है कि मधेपुरा विधानसभा क्षेत्र में करीब 30 प्रतिशत यादव मतदाता हैं, जो अब तक हर बार चुनावी परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं। इस बार कई यादव प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से समीकरण पूरी तरह उलट-पलट सकते हैं और मुकाबला अप्रत्याशित मोड़ ले सकता है।

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