बिहार के छपरा मंडल कारा में बंद एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के बाद मामला तूल पकड़ गया है। मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। मृतक उमाशंकर महतो पिछले छह महीने से बहु की हत्या के आरोप में जेल में बंद था।
परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल
सारण जिले के तरैया थाना क्षेत्र के उसरी गांव निवासी राजेंद्र महतो के पुत्र 45 वर्षीय उमाशंकर महतो को 18 जून 2025 को पुलिस ने बहु की कथित हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर छपरा जेल भेजा था। जबकि परिजनों का कहना है कि बहु ने आत्महत्या की थी और उमाशंकर निर्दोष था। परिवार के अनुसार 16 नवंबर को जेल में उमाशंकर की तबीयत खराब हुई, जिसके बाद उसे छपरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज ठीक से नहीं होने के कारण 18 नवंबर को स्थिति और बिगड़ गई। दोबारा अस्पताल भेजे जाने के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर सही उपचार न मिलने से उमाशंकर की जान गई।
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किस मामले में भेजा गया था जेल?
मृतका काजल कुमारी के भाई सुनील कुमार महतो ने पानापुर थाने में ससुराल पक्ष-सास, ससुर, पति और ननद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि बुलेट मोटरसाइकिल और तीन लाख रुपये दहेज नहीं देने पर काजल की गला दबाकर हत्या कर दी गई। एफआईआर के आधार पर 18 जून को सास राजकुमारी देवी और ससुर उमाशंकर महतो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। मृतका का पति सतेंद्र महतो भी पिछले सप्ताह अदालत में आत्मसमर्पण कर चुका है।
गांव में मातम, जेल प्रशासन पर उठ रहे सवाल
उमाशंकर का शव गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। पिता और भाई ने स्पष्ट कहा कि उमाशंकर बेगुनाह था, बहु ने खुद आत्महत्या की थी। परिवार का आरोप है कि जेल प्रशासन की लापरवाही के कारण उसकी मौत हुई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
राजनीतिक नेताओं का दौरा, जांच की मांग तेज
घटना के बाद राजद नेता और विधानसभा प्रत्याशी शैलेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर अमरनाथ सिंह और मोहम्मद शबीर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने परिजनों को सांत्वना दी और आरोप लगाया कि जेल में हुई मौत संदिग्ध है। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों में आक्रोश है, जबकि प्रशासन मामले की जांच में जुटा है।



