नेपाल के जेन-जी जैसी हिंसा और बवाल को भड़काने की साजिश मुजफ्फरपुर में रची गई थी। इस मामले में पुलिस ने गंभीरता दिखाते हुए साइबर थाने में कांड दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि जिले की एक युवती ने सोशल मीडिया पर एक फर्जी वीडियो पोस्ट किया था, जिसे बिहार चुनाव के बाद हुए कथित विरोध-प्रदर्शन के रूप में पेश किया गया।
पुलिस के अनुसार, इस पोस्ट को भ्रामक और माहौल बिगाड़ने वाला मानते हुए कार्रवाई प्रारंभ की गई है। साइबर थाने में दर्ज एफआईआर में करिश्मा अजीज नामक युवती को आरोपी बनाया गया है। साइबर पुलिस सेल के एक कर्मी के आवेदन पर मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि करिश्मा अजीज ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक नकली वीडियो वायरल किया और दावा किया कि यह बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 की मतगणना के बाद प्रदेश में फैले विरोध-प्रदर्शनों का दृश्य है।
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जबकि, पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मतगणना के बाद बिहार में कहीं भी ऐसा कोई वास्तविक विरोध-प्रदर्शन नहीं हुआ था। इसके बावजूद वीडियो को वास्तविक घटना बताकर प्रसारित किया गया, जिससे आम जनता में नफरत, भ्रम और अशांति फैलने की संभावना थी।
साइबर थाने के अधिकारी ने बताया कि 16 नवंबर की शाम यह सूचना मिली कि एक युवती द्वारा भ्रामक वीडियो वायरल किया जा रहा है। वीडियो की प्रस्तुति से ऐसा प्रतीत होता है कि बिहार में नेपाल की तरह जेन-जी जैसी हिंसक घटनाओं का माहौल तैयार करने या उकसाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस अब इस मामले में तकनीकी जांच और आवश्यक विधिक कार्रवाई कर रही है।



