बिहार विद्यालय परीक्षा समिति एक साथ तीन ISO सर्टिफिकेट हासिल करने वाला देश का पहला राज्य बोर्ड बन गया है। बिहार बोर्ड की ओर से ये सभी ISO सर्टिफिकेट समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने प्राप्त किए। बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने शनिवार दोपहर इस मामले पर आज प्रेस वार्ता की। उन्होंने तीनों ISO सर्टिफिकेट को दिखाते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। समिति को एक साथ तीन प्रतिष्ठित ISO सर्टिफिकेट प्रदान किए गए हैं। इसके साथ ही बिहार बोर्ड देश का पहला राज्य बोर्ड बन गया है, जिसे गुणवत्ता, सूचना सुरक्षा और रिकॉर्ड प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ISO प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि बिहार बोर्ड को गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के लिए ISO 9001:2015, सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली के लिए ISO/IEC 27001:2022 और उत्कृष्ट रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली के लिए ISO 15489-1:2016 सर्टिफिकेट प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचारों के लिए उनके नेतृत्व में किए गए प्रयासों का यह बड़ा परिणाम माना जा रहा है।
सात वर्षों से सबसे पहले जारी हो रहा रिजल्ट
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि तकनीक के व्यापक उपयोग और परीक्षा सुधारों के चलते बिहार बोर्ड वर्ष 2019 से 2025 तक लगातार सात वर्षों से देश में सबसे पहले मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाओं का परिणाम जारी कर रहा है। यह अपने आप में एक कीर्तिमान है।
रिकॉर्ड, सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष जोर
आनंद किशोर ने कहा कि समिति द्वारा परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में आमूल-चूल बदलाव किए गए हैं। 1983 से 2025 तक के मैट्रिक और इंटर के सभी रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज किया गया है। समिति को पेपरलेस बनाते हुए कंप्यूटरीकरण के जरिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। रिकॉर्ड रूम का सुदृढ़ीकरण कर ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से सुरक्षित संधारण किया जा रहा है।
ERP और E-Office से बढ़ी पारदर्शिता
बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने कहा कि बोर्ड के सभी कार्यों को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत करने के लिए ERP सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत अकादमिक, लेखा-वित्त, मानव संसाधन, विधि, विजिलेंस, शिकायत निवारण और सामग्री प्रबंधन जैसे मॉड्यूल प्रभावी रूप से काम कर रहे हैं। वहीं E-Office प्रणाली के जरिए फाइलों की ऑनलाइन मूवमेंट से रिकॉर्ड सुरक्षित और सुव्यवस्थित बना है।
प्री–एग्जाम और पोस्ट-एग्जाम सॉफ्टवेयर
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि परीक्षा से पूर्व और बाद की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, परीक्षा फॉर्म, ई-एडमिट कार्ड, ऑनलाइन फीस कलेक्शन, परीक्षा के बाद रिजल्ट प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर के जरिए
करोड़ों दस्तावेजों का विधिवत और सुरक्षित संधारण किया जा रहा है।
अत्याधुनिक डेटा सेंटर की स्थापना
बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने कहा कि समिति ने 200 टीबी क्षमता वाले अत्याधुनिक डेटा सेंटर की स्थापना की है, जिसे लगातार विस्तार दिया जा रहा है। इसके माध्यम से छात्रों के रिकॉर्ड, विभिन्न सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर एप्लिकेशन पूरी तरह सुरक्षित रखे जा रहे हैं। वहीं वर्ष 2018 से OFSS के जरिए इंटर में नामांकन की ऑनलाइन व्यवस्था लागू है। 2018 से 2025 तक 96 लाख से अधिक छात्रों ने 11वीं कक्षा में ऑनलाइन नामांकन लिया, जिनके रिकॉर्ड का संधारण समिति द्वारा किया जा रहा है।



