Bihar CAG Report- सीएजी(CAG) रिपोर्ट ने एक बार फिर से खोल के रख दी है बिहार के सुशाशन सरकार की पोल

CAG रिपोर्ट की माने तो नगरपालिका के एलईडी लाइट लगाने के ठेकों समेत  बिहार स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड  के द्वारा बांटे गए ठेकों मे कई स्तर पर अनियमितताएँ पायी गयी है। नियमो की अनदेखी कर ऐसे ठेकेदारों को ठेके बांटे गए जो उस काम को करने के लिए योग्य थे ही नहीं

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BLN- सीएजी(CAG) रिपोर्ट ने एक बार फिर से खोल के रख दी है बिहार के सुशाशन सरकार की पोल । CAG ने अपने रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है की बिहार सरकार अपने द्वारा ही निर्धारित लक्ष्यों को पूरा कर पाने  में किस प्रकार असफल रही है । रिपोर्ट में चिकित्सा एवं शिक्षा से जुड़े परियोजनाओं को समय से पूरा नहीं कर पाने के लिए सरकार की आलोचना की गई है । आपको बताते चलें की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 12 मेडिकल कॉलेज का निर्माण होना था लेकिन धरातल पर केवल 2 मेडिकल कॉलेज ही अब तक पूरी तरह से अस्तित्व मे आ पाये है , जो की यकीनन निर्धारित लक्ष्य से काफी कम है ।

 बिहार आबादी की दृष्टि से देश का तीसरा सबसे घनी आबादी वाला राज्य है । एक लाख की आबादी पर सरकारी डॉक्टर-नर्स-प्रसाविका के अनुपात का राष्ट्रीय औसत 221 है. वहीं, बिहार में यह अनुपात 19.74 था. सीएजी ने अपने रिपोर्ट में पाया है कि वर्ष 2006-07 से 2016-17 के बीच 12 मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य शुरु किया गया था, लेकिन वर्ष 2018 तक केवल दो मेडिकल कॉलेज कार्यरत हो सके हैं. 2018 तक 61 के लक्ष्य के बजाय महज दो नर्सिंग संस्थानों का निर्माण हो सका है. बिहार सरकार के मौजूदा मेडिकल कॉलेजों की सीटों को भी बढ़ाने की कोशिश तक नहीं की गई.

बिहार में एक लाख की आबादी पर फीजिशियन, आयुष चिकित्सक, दंत चिकित्सक और नर्सों की 92 फीसदी तक सीटें खाली हैं. मेडिकल शिक्षा की सभी शाखाओं में टीचिंग स्टाफ की कमी 6-56 फीसदी और नॉन टीचिंग स्टाफ की कमी 8-70 फीसदी के बीच रही. 5 मेडिकल कॉलेजों में टीचिंग घंटों में एमसीआई की शर्तों के खिलाफ 14 से 52 के बीच कमी पाई गई है. टीचिंग ऑवर में कमी का कारण फैकल्टी का ना होना है.

बात चाहे पंचायती राज की हो या नगरपालिकाओं की ,सभी स्तर पर मैनपावर का आभाव पाया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया की पंचायत सचिव ,ग्राम पंचायत स्तर पर सभी मामलों को देखने के लिए केवल एक हीं व्यक्ति था और अगर पदों की बात करें तो राज्य स्तर पर 56 फीसदी पद अभी भी खाली पड़े हुए हैं ।

सरकारी ठेकों में भी की गई जमकर लूट खसोट

CAG रिपोर्ट की माने तो नगरपालिका के एलईडी लाइट लगाने के ठेकों समेत  बिहार स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड  के द्वारा बांटे गए ठेकों मे कई स्तर पर अनियमितताएँ पायी गयी है। नियमो की अनदेखी कर ऐसे ठेकेदारों को ठेके बांटे गए जो उस काम को करने के लिए योग्य थे ही नहीं ।

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