बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए होने वाले मतदान से पहले तमाम राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। समर्थकों को लुभाने के लिए सत्ताधारी खेमा आर्थिक मदद, नौकरी-रोजगार के वादे, और पुरानी सरकारों के बुरे दौर का हवाला दे रहा है। दूसरी तरफ विपक्षी राजनीतिक पार्टियां आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार की तरफ से बड़ी संख्या में महिलाओं को दी गई आर्थिक मदद को रिश्वत बता रहे हैं।
ये भी दिलचस्प है किदेश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी- कांग्रेस, बिहार की सत्ता से लंबे समय से दूर है। तीन दशक से भी अधिक समय पहले कांग्रेस पार्टी नेता को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला था। आज आलम ये है कि कांग्रेस महागठबंधन में सहयोगी दल के रूप में किस्मत आजमा रही है। बिहार के मतदाता इस चुनाव में किसका साथ देंगे? क्या कांग्रेस पार्टी अपना जनाधार मजबूत करने में कामयाब होगी? क्या कांग्रेस-राजद-भाकपा-माले जैसे दलभाजपा-जदयू-लोजपा (रामविलास) जैसे दलों वाली एनडीए की रणनीति की काट खोज सकेंगे? राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इस चुनाव को कैसे देखते हैं? ऐसे तमाम राजनीतिक सवालों पर अमर उजाला ने कांग्रेस नेता और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की प्रमुख अलका लांबा से विस्तार से बात की। देखिए पूरा इंटरव्यू
बिहार चुनाव में महिलाओं की क्या भूमिका होगी? कांग्रेस पार्टी को अपनी छवि बदलने में कितनी सफलता मिलेगी? आधी आबादी से नीतीश कुमार की सरकार को मिलने वाले समर्थन की काट क्या है? इन सवालों पर अलका लांबा ने कहा, राज्य में करीब 3.5 करोड़ महिला वोटर हैं। इनमें लगभग 1.40 करोड़ आजीविका दीदी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे से साफ है कि अब महिलाओं का सरकार से मोहभंग हो रहा है।
राहुल गांधी की यात्राओं से बदलाव की शुरुआत
अलका लांबा के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में आने वाली महिलाओं ने कैमरे के सामने कहा है कि उन्हें डराकर लाया गया है, पहले से पता होता कि भाजपा या पीएम मोदी की चुनावी सभा है तो वे नहीं आतीं। कांग्रेस पार्टी ने इस सच्चाई दिखाने के लिए इन वीडियो क्लिप्स को शेयर भी किया है। इनका गुस्सा और नाराजगी मतदान में दिखेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की तरफ से राहुल गांधी ने जो भारत जोड़ो यात्रा, वोटर अधिकार यात्रा जैसी मुहिम चलाई। इससे भी बदलाव की बयार बही और लोगों के सामने विकल्प खड़ा हुआ। महिलाओं का विश्वास जीतने में भी कांग्रेस सफल रही।
मतदान से ऐन पहले महिलाओं के खातों में पैसे डाल रहे प्रधानमंत्री
उन्होंने कहा कि आज से करीब आठ महीने पहले कांग्रेस पार्टी ने न्याय की गारंटी का एलान किया था। इसका असर दिखने लगा था। अब इसकी नकल करते हुए भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मतदान से ऐन पहले महिलाओं के खातों में आनन-फानन में 10 हजार रुपये डालने की कोशिश की। अलका लांबा ने कहा, कांग्रेस पार्टी महिला मतदाताओं को समझाने का प्रयास कर रही है कि 10 हजार रुपये धोखा और छलावा है, जिसे हम रिश्वत कह रहे हैं।
कांग्रेस का दावा- कई राज्यों में चुनावी घोषणापत्र के वादेपूरे
अलका लांबा के मुताबिक मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी सरकार ने ऐसे ही आर्थिक मदद का एलान किया था। बिहार की तरह ही मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी धोखा हुआ था। कांग्रेस पार्टी महिलाओं की पासबुक चेक करने की चुनौती देती है। पता करना चाहिए कि कितनी महिलाओं को मदद मिली है। छलावा यही है कि महंगाई और गरीबी के बावजूद पूरे पांच साल तक कोई आर्थिक मदद या राहत मत दीजिए और चुनाव से 10 दिन पहले उन्हें पैसे दे दीजिए। उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल जैसे राज्यों में कांग्रेस पार्टी ने अपने वादे पूरे करके दिखाए हैं।



