मकरासन-:Makarasana स्लिप डिस्क, साईटिका और दमा जैसी बीमारियों में लाभ पहुंचाने वाला आसन।

makarasana

BLN-: योगाभ्यास या योगासन करने से पहले और बाद में शरीर को शिथिल करना अथवा मांसपेसियों को तनावमुक्त करना अत्यंत हीं महत्वपूर्ण माना जाता है। शरीर को थकान मुक्त बनाने के लिए यूं तो योग में शिथिलीकरण के कई आसन हैं जैसे शवासन, अद्वासन, ज्येष्टिकासन, मतस्य क्रीड़ासन और मकरासन (Makarasana)

ऊपर बताए गए शिथिलीकरण के सभी आसनों में मकरासन (Makarasana) का अपना एक अलग और विशेष महत्व है। मकरासन (Makarasana) पीठ अथवा मेरुदंड से संबन्धित समस्याओं से पीड़ित ब्यक्ति के लिए बहुत हीं लाभकारी आसन है।

यूं तो मकरासन देखने में बहुत हीं सरल और आसान प्रतीत होता है लेकिन इस आसन को बिल्कुल सही ढंग से करना कठिन है क्योंकि इस आसन में शरीर की मांसपेशियों को सचेत होकर शिथिल और तनावमुक्त करना होता है। मकरासन (Makarasana) का सम्पूर्ण और सही लाभ प्राप्त करने के लिए नीचे बताए गए तरीके से ही यह आसन करें।

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मकरासन (Makarasana) कैसे करें?    

आपके पास यदि योगा मैट है तब तो बहुत हीं बढ़ियाँ यदि योगा मैट नहीं है तब आप किसी कंबल या मोटी दरी का उपयोग करें। आसन तैयार होने के बाद उसपर पेट के बल सपाट लेट जाएँ।

कोहनियों को जमीन पर रखते हुए उसके सहारे सिर और कंधों को उठाएँ और ठुडढ़ी को हथेलियों पर टिका दें। पीठ अथवा मेरुदंड को अधिक लाभ पहुंचाने के लिए कोहनियों को एक साथ रखें। गार्डन पर दवाब की अधिकता को कम करने के लिए कोहनियों को ठोरा अलग कर लें।

मकरासन (Makarasana) में दो बिन्दुओं पर प्रभाव महसूस होता है एक तो गर्दन और दूसरा पीठ का निचला भाग।

यदि कोहनियाँ सामने वक्ष से अधिक दूर हों तो गर्दन में तनाव महसूस होता है, यदि कोहनियों को वक्षस्थल के बहुत निकट लाया जाए तो पीठ के निचले भाग में अधिक तनाव महसूस होगा। कोहनियों की स्थिति को इस प्रकार समायोजित कर लें कि इन दोनों हीं बिन्दुओं पर संतुलित प्रभाव पड़े। इसके पश्चात सम्पूर्ण शरीर को शिथिल छोड़ दें और आंखे बंद कर लें।

मकरासन (Makarasana) करते समय श्वसन को सहज, सामान्य और लयपूर्ण रखें। आसन करते समय अपना ध्यान श्वसन क्रिया पर रखे अथवा पीठ के निचले भाग पर एकाग्रता के साथ श्वास की गिनती करें और ध्यान सम्पूर्ण शरीर के शीथलिकरण पर रखें।

जिन्हें पीठ या मेरूदण्ड की शिकायतें हैं, वे श्वास लेते समय अपना ध्यान मेरूदण्ड के निचले भाग से गर्दन तक और श्वास छोड़ते समय गर्दन से रीढ़ की साबसे अंतिम हड्डी तक ले जाएँ और इसके साथ हीं ऐसी कल्पना करें कि सांस ऊपर- नीचे उसी प्रकार आ-जा रही है जैसे काँच की नली में पारा ऊपर नीचे होता है। तनाव के कारण पीठ के निचले भाग में होने वाले दर्द से आराम के लिए उस क्षेत्र में एकाग्रता को बढ़ाएँ और महसूस करें कि सांस लेने और छोड़ने के साथ वह फैलकर तनावमुक्त हो रहा है।

मकरासन (Makarasana) करने के लाभ

स्लिप डिस्क, साईटिका, पीठ के निचले भाग के दर्द अथवा मेरूदण्ड की किसी भी गड़बड़ी में यह आसान बड़ा प्रभावकारी एवं लाभकारी है। इन रोगों से पीड़ित ब्यक्ति को इस आसन में लंबे समय तक रहना चाहिए।

मकरासन मेरुदंडीय तंत्रिकाओं को दबाव से मुक्त करता है। दमा और फेफड़ों के अन्य रोगों से पीड़ित लोगों को यह सरल आसन नियमित रूप से श्वास की सजगता के साथ करना चाहिए क्योंकि इससे फेफड़ों में अधिक वायु का प्रवेश होता है।

आम तौर पर मकरासन दिन में कभी भी किया जा सकता है।

मकरासन आप अपनी सुविधा के अनुसार सुखदायक अवधि तक कर सकते हैं।

पीठ की समस्या वाले अभ्यासी को यदि अभ्यास के दौरान अत्यधिक दर्द महसूस हो तो उन्हे इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

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