बिहार में सियासी पारा हर दिन चढ़ता ही जा रहा है और इस बीच अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ सुपौल की धरती पर पहुंच चुका है। आज 28 अक्तूबर की शाम को राजनेताओं से जनता के मुद्दे पर सवाल पूछे गए। इसके साथ ही उनके दावों-वादों को तोला गया कि किसके पक्ष में सियासी हवा बह रही है। जनता की उम्मीदें और सवाल क्या हैं? पहले जानते हैं चाय पर चर्चा और युवाओं से चर्चा के दौरान क्या बातें हुईं।
चाय पर चर्चा
सुपौल के स्थानीय निवासी मोहम्मद हैदर ने कहा कि सुपौल में विकास सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां काफी काम हुआ है। सड़क, बिजली, पानी जैसी जरूरी सुविधाएं अब लगभग पूरी हो चुकी हैं। हमें लगता है कि पुराने और अनुभवी नेता ही इस विकास को आगे बढ़ा पाएंगे। मोहम्मद रजा हुसैन ने बताया कि विजेंद्र प्रसाद यादव 1990 से सुपौल के विधायक हैं। उनके रहते यहां कभी किसी की हिम्मत नहीं हुई कि कोई रंगदारी मांग सके। जितना विकास सुपौल में हुआ है, उतना कम समय में कहीं और नहीं हुआ। उनकी उम्र ज़रूर बढ़ी है, लेकिन सोच आज भी एक युवा जैसी है। पलायन की समस्या भी अब काफी हद तक कम हुई है।
सद्दाम हुसैन ने कहा कि यहां रोजगार की बहुत कमी है। मैं पिछले 35 वर्षों से अस्पताल में काम कर रहा हूं, लेकिन हालात अब भी वैसे ही हैं। अगर कोई मरीज आता है तो उसे तुरंत दरभंगा रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि यहां इलाज की ठीक व्यवस्था नहीं है। एजाज ने बताया कि यहां कोई बड़ा विकास नहीं हुआ है। हाल ही में आई बाढ़ में लोग बांध पर रह रहे थे। मैंने आज तक अपने विधायक को इलाके में नहीं देखा। उनके आसपास के लोग बस उनकी तारीफ करते रहते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है।
पढ़ें:खूनी झड़प में युवक की गोली मारकर हत्या, जांच में जुटी पुलिस; नशे को लेकर हुआ था विवाद
मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कहा कि यहां विकास सिर्फ उन्हीं लोगों का हुआ है जो विधायक के करीबी हैं। बाकी लोग जैसे थे वैसे ही हैं। हमारे बच्चों के लिए नए स्कूल बनने चाहिए क्योंकि पढ़ाई की सही सुविधा नहीं है। मोहम्मद सलाउद्दीन ने कहा कि सुपौल में पिछले कुछ वर्षों में काफी विकास हुआ है। यहां नए स्कूल बने हैं और कई स्कूलों को 10+2 में अपग्रेड किया गया है। अब बच्चों के लिए पढ़ाई की अच्छी सुविधा है। सुपौल में माहौल शांत और आपसी सौहार्द वाला है। यहां अपराध बहुत कम हुआ है। जो लोग आज सवाल उठा रहे हैं, उन्हें 30 वर्षो पहले के हालात याद करने चाहिए और आज के बदलाव को देखना चाहिए।
युवाओं से बात
स्थानीय निवासी संदीप कुमार झा ने कहा कि हमारे इलाके में विधायक ने बहुत अच्छा विकास किया है। इतना विकास शायद किसी और क्षेत्र में नहीं हुआ होगा। गांधी मैदान में लोग आराम से छठ पूजा मना पा रहे हैं, यह भी हमारे विधायक की मेहनत का नतीजा है। मोहम्मद नरुल अंसारी ने बताया कि हमेशा पलायन और नौकरी की बात करता है, लेकिन सबसे ज्यादा नौकरियां तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही दी हैं। उन्होंने गांधी मैदान में लाखों लोगों को एक साथ नौकरी दी थी। उन्होंने आगे कहा, विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं है, बस पलायन की बात दोहराता रहता है।
कृष्णा यादव ने कहा कि सुपौल में अब कोई बड़ी समस्या नहीं है। यहां जो भी विकास हुआ है, उसके लिए हम नीतीश कुमार को ही वोट देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि नीतीश कुमार लगातार युवाओं की मदद कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं को 10 लाख रुपये की सहायता दी है। मुझे भी इसका फायदा मिला है, अब मैं अपनी दुकान चला रहा हूं।
राजनीति चर्चा
सवाल गठबंधन पर शुरू हुआ। इस पर जदयू नेता ओम प्रकाश ने कहा कि हमारा पुराना गठबंधन तो एनडीए के साथ ही रहा है। बीच-बीच में जब राजद मृत्यु अवस्था में थी, तब हमने ऑक्सीजन देने का काम किया था। इसलिए वे 17 महीने तक जीवित रहे, क्योंकि 15 साल में उन्होंने कभी ऑक्सीजन लेने का काम नहीं किया था।
इस पर राजद नेता विद्याभूषण ने पलटवार करते हुए कहा कि जो काम नीतीश सरकार 17 साल में नहीं कर पाई, वह काम तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के साथ मिलकर 17 महीने में कर दिखाया। तेजस्वी यादव ने अपने मैनिफेस्टो में 10 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, और जब नीतीश कुमार के साथ गठजोड़ हुआ तो उन्होंने 5 लाख लोगों को रोजगार देने का काम किया। हमारे नेता ने अपना वादा पूरा किया। अब विपक्ष में रहकर कोई भी कुछ कहे, लेकिन इस सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता।
राजद नेता के ‘नौकरी वाले बयान’ पर जदयू नेता ओम प्रकाश ने तंज कसते हुए कहा कि जिस शिक्षा विभाग की बात ये कर रहे हैं, उसी विभाग के मंत्री अपने विभाग में टिक नहीं पाए। उनकी स्थिति ऐसी थी कि उनका टिकट तक काट दिया गया था। आख़िरी दौर में उन्हें टिकट मिला। यही स्थिति इनकी पार्टी के शिक्षा मंत्री की थी। इसलिए हमने ऑक्सीजन की पाइप खींच ली।
इसके बाद भाजपा नेता एनडी ठाकुर से ऑक्सीजनवाले बयान पर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि “बिहार में एनडीए पांच पार्टियों का गठबंधन है, यानी पाँच पांडव। जदयू से हमारा स्वाभाविक गठबंधन है और नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार में विकास की बयार बह रही है। पहले के सुपौल और अब के सुपौल में काफी अंतर है। पहले यहां छोटी लाइन थी, अब बड़ी लाइन बिछा दी गई है। पहले लोग यहां से पटना जाने में कतराते थे, अब यहीं से दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता तक जा सकते हैं।
कांग्रेस नेता क्या बोले
वहीं कांग्रेस नेता जीतेन्द्र झा से जब इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “हम सबका जवाब देंगे, लेकिन जदयू के ओम प्रकाश जी ने जो कहा कि जब राजद मृत्यु अवस्था में होता है, तो वे सांस देने का काम करते हैं।असल सच्चाई यह है कि जब जदयू को लगता है कि भाजपा उन्हें मृत्यु के कगार पर ले जा रही है, तब वे हमारे महागठबंधन में आकर सांस लेने लगते हैं। अब शायद नीतीश जी को फिर अहसास हुआ है कि भाजपा उन्हें फिर ‘मृत घोषित’ करने के चक्कर में है, इसलिए वे अब फिर सांस लेने की संभावना तलाश रहे हैं।
कोसी नदी से जुड़े सवाल पर कोसी मुक्ति संघर्ष समिति के सुशील यादव ने कहा कि “मौजूदा सरकार ने दोनों तटबंधों के बीच जो व्यवस्था की है, और पूर्णिया से दरभंगा तक लगभग 125 किलोमीटर की जो ज़मीन व्यवस्थित की गई है, जब तक सरकार इसकी पूरी व्यवस्था नहीं करेगी, तब तक 2008 जैसी त्रासदी दोबारा आ सकती है। यदि ऐसा हुआ, तो आज जो इंफ्रास्ट्रक्चर आप देख रहे हैं, वह फिर धराशायी हो जाएगा।



