बिहार का औरंगाबाद इस वक्त सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि चुनावी जोश से धड़कता हुआ एक जीवंत मंच बन गया है। खेतों में लहराती धान की बालियां मानो लोकतंत्र की नई फसल बन गई हों। गलियों और चौपालों से लेकर चाय की दुकानों तक बस एक ही सवाल तैर रहा है, “इस बार सत्ता की चाबी किसके हाथ जाएगी?” जब ‘अमर उजाला’ का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ यहां पहुंचा, तो लगा मानो इस मिट्टी की हर धड़कन में लोकतंत्र की आवाज़ गूंज रही हो, कहीं उम्मीदों की कोंपलें फूट रही हैं, तो कहीं नारों का शोर इस जंग को और दिलचस्प बना रहा है।
हिरण्य कुमार सिंह ने कहा, “यहां बीजेपी की जीत तय है। नीतीश कुमार की सरकार ने बहुत काम किया है। लोगों ने विकास देखा है। महिलाओं को आर्थिक मदद मिल रही है और युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है। नीतीश कुमार ने नौकरी देने के लिए लगातार काम किया है। इसलिए यहां एनडीए को जीत मिलेगी।”
उदय भारती ने कहा, “यहां के लोग अब बदलाव चाहते हैं। सरकार से लोगों में निराशा है क्योंकि वह उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी है। इस बार महिलाएं भी नाराज दिख रही हैं, जो पहले नीतीश कुमार का समर्थन करती थीं।”
प्रमोद रंजन ने कहा, “यहां मुकाबला सीधा दो गठबंधनों के बीच है, महागठबंधन और एनडीए। बसपा के उम्मीदवार भी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य लड़ाई इन्हीं दो के बीच है। यहां शिक्षा और स्वास्थ्य की हालत खराब है। अस्पतालों में इलाज नहीं होता, सिर्फ मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। इसलिए इस बार महागठबंधन को बढ़त मिल सकती है।”रवीन्द्र कुमार ने कहा, “यहां किसी पार्टी को बढ़त नहीं दिख रही है। गरीब लोगों के लिए कोई भी सरकार ईमानदारी से काम नहीं कर रही है।”
रंजय शर्मा ने कहा, “हम बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं। पार्टी ने यहां अच्छा काम किया है और हमें प्रधानमंत्री मोदी का काम पसंद है।” सोनू कुमार ने कहा, “हम भी बीजेपी के साथ हैं। बीजेपी ने शहर में सड़कों और बिजली के काम में काफी सुधार किया है। रोजगार के लिए भी सरकार कोशिश कर रही है। नीतीश कुमार को बिहार को और आगे बढ़ाने के लिए थोड़ा और समय चाहिए।” ललन सिंह ने कहा, “इस बार बिहार में एनडीए की सरकार बनेगी। प्रधानमंत्री मोदी हमारे दिल में बसते हैं। हम कई बार उनकी रैली में गए हैं और इस बार भी हम एनडीए को वोट देंगे।”



