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शिक्षा मंत्री ध्यान दें-: दिहाड़ी मजदूर से भी बदतर स्थिति हो गई है बिहार के नव नियुक्त शिक्षकों की।

BLN:बिहार सरकार और बिहार के शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण बिहार के लगभग 42 हज़ार नवनियोजित शिक्षकों को सुदूर और दुर्गम इलाकों में अपनी सेवा देते हुए लगभग 3 महीने हो चुके हैं लेकिन अब तक उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है जिसके कारण शिक्षकों को अपना और अपने परिवार का खर्च चलाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस बार शिक्षकों को वैसे विद्यालयों में पदस्थापित किया गया है जहां अब तक कोई जाना नहीं चाहता था। ज़्यादातर नव नियोजित शिक्षकों को अपने घर से दूर दुर्गम इलाकों में विद्यालय आवंटित किया गया है। शिक्षक या तो किराये पर घर लेकर रह रहे हैं या अपने घर से प्रतिदिन आना-जाना करते है। दोनों हीं परिस्थितियों में कम से कम 7 से 15 हज़ार रु प्रतिमाह उनका खर्च हो रहा है। पिछले तीन महीनों में उनकी सारी जमापूंजी या तो खर्च हो चुकी है या समाप्त होने वाली है । दिहाड़ी मजदूर से भी बदतर स्थिति हो गई है शिक्षकों की। दिहाड़ी मजदूरों को कम से कम यह तो पता होता है की उन्हे उनके काम के बदले शाम में मजदूरी मिल जाएगी लेकिन बिहार के नियोजित शिक्षकों को यह भी पता नहीं है की उन्हे अपने काम के एवज में मिलने वाला वेतन आखिर कब मिलेगा?  

9 महीनों में भी नहीं हो पाया है प्रमाणपत्रों का सत्यापन

छठे चरण में नियुक्त नियोजित शिक्षकों का वेतन उनके प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बाद देने की बात कही गई थी, इस बीच 23 अप्रैल को बिहार प्राथमिक शिक्षा के निदेशक श्री रवि प्रकाश द्वारा एक आदेश निर्गत किया गया जिसमें वैसे नव नियुक्त शिक्षकों के वेतन की प्रक्रिया आरंभ करने की बात कही गई है जिनके प्रमाण पत्रों का सत्यापन हो चुका है।  

प्रमाण पत्रों के सत्यापन में फस गया है पेंच

छठे चरण में नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच में सबसे बड़ी अर्चन यह आ रही है की ज़्यादातर राज्य जिसमें बिहार भी शामिल है वहाँ के university के साथ हीं मैट्रिक और इंटर करवाने वाले बोर्ड और काउंसिल प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए फीस ले रहे हैं।

यह फीस 100 रु से लेकर कहीं-कहीं  2500 रु तक है। प्रमाण पत्र के सत्यापन के लिए डीडी के रूप में यह फीस प्रत्येक जिला के शिक्षा विभाग को उन विश्वविद्यालयों और बोर्ड में भेजना है जहां से उन्हे प्रमाण पत्रों का सत्यापन करवाना है।

विडम्बना यह है की राज्य सरकार द्वारा अब तक इस कार्य हेतु फंड उपलब्ध हीं नहीं करवाया गया है जिसके कारण नव नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन पिछले 9 महीनों से नहीं हो पाया है और सरकार के ढुलमुल रवैये को देखकर लग रहा है की अगले 9 महीनों तक भी नहीं हो पाएगा।

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