Saturday, January 31, 2026
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UP: बांके बिहारी का तोषखाना…बर्तन और आभूषणों के खाली बॉक्स; खजाना खुलते ही उठा सवाल, कहां गया ठाकुरजी का माल?


श्री बांकेबिहारी मंदिर का खजाना (तोषखाना) 54 वर्ष के बाद शनिवार को धनतेरस के अवसर पर खोला गया, लेकिन फिलहाल कोई बेशकीमती चीज इसमें नहीं मिली। खजाने में पीतल के बर्तन, संदूक और आभूषणों के खाली बॉक्स ही मिले हैं। अफसरों की निगरानी में दिल्ली से आए सीए ने पूरे सामान की सूची बनाई। जिलाधिकारी सीपी सिंह के मुताबिक एक कमरा और बचा है जिसे रविवार को खोला जाएगा।

खजाने में बड़े पैमाने पर हीरे, जवाहरात होने की बात कही जा रही थी मगर ऐसा कुछ नहीं निकला। इस दौरान सेवायतों ने हंगामा और नारेबाजी भी की। इसके बाद खजाने को फिर से सील कर दिया गया।




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बांकेबिहारी मंदिर का खजाना।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


श्री बांकेबिहारी मंदिर की हाईपावर्ड कमेटी ने अपनी पहली बैठक में मंदिर के खजाने (तोषखाना) को खोलने के आदेश दिए थे। चूंकि तोषखाना में कोर्ट की सील लगी हुई थी तो प्रशासन ने सिविल जज जूनियर डिवीजन को कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। कोर्ट ने 18 अक्तूबर को खजाना खोलने की तिथि नियत की थी। दोपहर एक बजे हाईपावर्ड कमेटी और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मंदिर पहुंची।


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बांकेबिहारी मंदिर।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


दो सांप भी निकले

कमेटी के सदस्य सेवायत दिनेश गोस्वामी ने तोषखाने के द्वार पर दीप जलाकर पूजा की। जंग लगे ताले को कटर से काटा गया। बरसों से बंद पड़े खजाने में गैस निकली। इसके बाद मलबा नजर आया। मलबे की सफाई करने के बाद टीम ने अंदर पहुंचकर तोषखाने को चेक किया। इसी दरम्यान दो सांप निकलने के कारण टीम पीछे हट गई। वन विभाग की टीम ने सांपों को पकड़ा।


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बांकेबिहारी मंदिर का खजाना।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


इसके बाद तलाशी कराई गई। खजाने में अभी तक पीतल के बर्तन, संदूक, लकड़ी का चौखटनुमा मंदिर और आभूषणों के खाली बॉक्स ही निकले हैं। एडीएम प्रशासन पंकज कुमार ने बताया कि खजाने में कोई कीमती वस्तु नहीं मिली है। एक कमरा और शेष रह गया है। दो बॉक्स भी हैं। इन्हें रविवार को खोला जाएगा।


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बांकेबिहारी मंदिर।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


धनतेरस पर बड़ी उम्मीदों से खोला था खजाना

यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है कि ठाकुर श्री बांकेबिहारी मंदिर का तोषखाना खाली होगा और दबी जुबान इस बात की चर्चाएं भी कर रहे हैं। धनतेरस के दिन बड़ी उम्मीदों के साथ यह तोषखाना खोला था। सभी को उम्मीद थी कि यहां खजाना मिल सकता है, लेकिन यहां तो खोदा पहाड़ और निकली चुहिया जैसी कहावत चरितार्थ हो गई।


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