Wednesday, February 11, 2026
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आज का शब्द: लोल और जयशंकर प्रसाद की कविता ‘उठ-उठ री लघु-लघु लोल लहर’

                
                                                         
                            

हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - लोल जिसका अर्थ है1. चंचल 2. क्षुब्ध; अशांत 3. अस्थिर। कवि जयशंकर प्रसाद ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।

उठ-उठ री लघु-लघु लोल लहर!
करुणा की नव अँगराई-सी,
मलयानिल की परछाईं-सी,
इस सूखे तट पर छिटक छहर!

शीतल कोमल चिर कंपन-सी,
दुर्ललित हठीले बचपन-सी,
तू लौट कहाँ जाती है री—
यह खेल-खेल ले ठहर-ठहर!

उठ-उठगिर-गिर-गिर फिर-फिर आती,
नर्तित पद-चिह्न बना जाती,
सिकता की रेखाएँ उभार—
भर जाती अपनी तरल-सिहर!

तू भूल न री, पंकज वन में
जीवन के इस सूनेपन में,
ओ प्यार-पुलक से भरी ढुलक!
ओ चूम पुलिन के विरस अधर!

एक दिन पहले

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