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गैलप सर्वे: अमेरिका में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर हुई 37 फीसदी, जनता का भरोसा कमजोर

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गैलप सर्वे: अमेरिका में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर हुई 37 फीसदी, जनता का भरोसा कमजोर

अमेरिका में गैलप द्वारा जारी नवीनतम नेशनल ट्रैकिंग सर्वे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 37% पर पहुंच गई है, जो हालिया वर्षों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। सर्वे में शामिल 68% अमेरिकियों का कहना है कि संघीय सरकार का कामकाज काफी खराब है, जबकि केवल 26% लोगों ने सरकार के प्रदर्शन को संतोषजनक या सकारात्मक बताया।

यह नतीजे उस समय सामने आए हैं जब प्रशासन देश में महंगाई, सीमा सुरक्षा, स्वास्थ्य-व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय तनावों से निपटने का दावा कर रहा है। सर्वे में यह भी पाया गया कि सबसे तेज गिरावट स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) मतदाताओं और शहरी-युवा वर्ग में दर्ज हुई है। सर्वे रुझानों के अनुसार 18-29 आयु वर्ग में राष्ट्रपति ट्रंप की स्वीकृति दर केवल 31% रही, जो यह इशारा करती है कि युवा मतदाता आर्थिक संभावनाओं, छात्र-ऋण नीति और सामाजिक मुद्दों पर अधिक आलोचनात्मक दृष्टि रख रहे हैं। 30-49 आयु समूह में अप्रूवल 35% रहा, जबकि 50+ श्रेणी में अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन 42% तक दर्ज किया गया।

व्हाइट हाउस और राजनीतिक प्रतिक्रिया

व्हाइट हाउस ने इस सर्वे को क्षणिक सार्वजनिक भावना बताया और कहा कि प्रशासन आर्थिक सुधार, ऊर्जा-सुरक्षा, और सीमा नियंत्रण पर नीतिगत प्रगति कर रहा है। सरकारी प्रवक्ताओं ने तर्क दिया कि फोकस रेटिंग पर नहीं, नीतिगत काम पर है। दूसरी ओर डेमोक्रेटनेतृत्व ने इस रिपोर्ट को जनता का स्पष्ट आरोप-पत्र करार दिया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह स्थिति रिपब्लिकन रणनीति में बदलाव की जरूरत को रेखांकित करती है, विशेषकर उपनगरीय और स्वतंत्र मतदाताओं तक नई पहुंच रणनीति आवश्यक होगी।

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अमेरिकी मीडिया कवरेज और विशेषज्ञ राय

वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि अप्रूवल ड्रॉप प्रशासन के लिए चेतावनी है। जनता को नीतिगत परिणाम चाहिए। न्यूयॉर्क टाइम्स ने स्वतंत्र मतदाताओं में भरोसा टूटने को 2026 के लिए गंभीर संकेत बताया। फॉक्स ने तर्क दिया कि आर्थिक संकेतक सुधरने पर रेटिंग रिकवर हो सकती है, जबकि सीएनएन ने राजनैतिक ध्रुवीकरण और विधायी गतिरोध को असंतोष का मुख्य कारण बताया। पॉलिटिकल कम्युनिकेशन विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में आर्थिक संकेतकों और नीति-स्थितियों में सुधार बेहद जरूरी है।

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