लाल किला के पास 10 नवंबर को हुए बम धमाके की जांच के दौरान एक बड़ी जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि जैश से जुड़े फिदायीन हमलावर डॉ. उमर ने शायद ‘शू-बम’ (जूता बम) का इस्तेमाल कर धमाके को अंजाम दिया है। बम विस्फोट में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 20 से अधिक लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं।
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दिल्ली में धमाके के बाद जले वाहन
– फोटो : ANI
जूते से अमोनियम नाइट्रेट और टीएटीपी के ट्रेस मिले
सूत्रों के मुताबिक धमाके वाली जगह से मिले सबूतों और इकट्ठे किए गए बाकी सामान में एक जूते पर जांचकर्ताओं का ध्यान केंद्रित हो गया है। दरअसल उमर की आई-20 कार से मिले जूते से अमोनियम नाइट्रेट और टीएटीपी के ट्रेस मिले हैं। जांच टीम को कार के दाहिने अगले टायर के पास ड्राइवर की सीट के नीचे से जूता मिला है। जांच एजेसिया इसे शुरुआती सुराग बानकर आगे की कार्रवाई करने में जुटी हैं।
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दिल्ली में धमाके के बाद जले वाहन
– फोटो : ANI
जूते में कोई मैकेनिज्म छिपा रखा था
आशंका जताई जा रही है कि डॉक्टर उमर ने विस्फोट करने के लिए अपने जूते में कोई मैकेनिज्म छिपा रखा था। धमाके के लिए उसने इसी से स्पार्क किया और बम फट गया। जांच कर रही टीम का कहना है कि अमोनियम नाइट्रेट और टीएपी के साथ अन्य केमिकल ने धमाके को और घातक बनाया।
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दिल्ली में धमाके के बाद जले वाहन
– फोटो : ANI
शैतान की मां
टीएटीपी एक बेहद खतरनाक और संवेदनशील विस्फोटक माना जाता है। अक्सर आतंकी इसका इस्तेमाल करते हैं। यह मामूली झटके, रगड़ या थोड़ी सी गर्मी से भी फट सकता है। इसी वजह से आतंकी दुनिया में इसे ‘शैतान की मां’ नाम से जाना जाता है।
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ब्लास्ट की जांच कर रही एनआईए की टीम
– फोटो : AI
नेपाल और यूपी से खरीदे गए मोबाइल फोन व 17 सिमकार्ड…
धमाके को अंजाम देने के लिए जिन मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया था, उसे यूपी के कानपुर और पड़ोसी मुल्क नेपाल से खरीदा गया था। सूत्रों की माने तो ब्लास्ट को अंजाम देने के लिए नेपाल से 6 पुराने मोबाइल खरीदे गए थे। इनके लिए 17 सिम कार्ड का इंतजाम किया गया। इनमें छह सिम कार्ड कानपुर के बेकनगंज के एक व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर मिले हैं।



