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आज का शब्द: शारद और सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” की कविता- जीवन का विष बुझा हुआ है

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आज का शब्द: शारद और सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की कविता- जीवन का विष बुझा हुआ है
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- शारद, जिसका अर्थ है- शरद् काल संबंधी, शरद् काल का। प्रस्तुत है सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की कविता- जीवन का विष बुझा हुआ है
                                                                 
                            

पत्रोत्कंठित जीवन का विष बुझा हुआ है,
आज्ञा का प्रदीप जलता है हृदय-कुंज में,
अंधकार पथ एक रश्मि से सुझा हुआ है
दिङ् निर्णय ध्रुव से जैसे नक्षत्र-पुंज में ।

लीला का संवरण-समय फूलों का जैसे
फलों फले या झरे अफल, पातों के ऊपर,
सिद्ध योगियों जैसे या साधारण मानव,
ताक रहा है भीष्म शरों की कठिन सेज पर ।

स्निग्ध हो चुका है निदाघ, वर्षा भी कर्षित
कल शारद कल्य की, हेम लोमों आच्छादित,
शिशिर-भिद्य, बौरा बसंत आमों आमोदित,
बीत चुका है दिक्चुम्बित चतुरंग, काव्य, गति
यतिवाला, ध्वनि, अलंकार, रस, राग बन्ध के
वाद्य-छन्द के रणित गणित छुट चुके हाथ से--
क्रीड़ाएँ व्रीड़ा में परिणत । मल्ल भल्ल की--
मारें मूर्छित हुईं, निशाने चूक गए हैं ।

झूल चुकी है खाल ढाल की तरह तनी थी।
पुनः सवेरा, एक और फेरा है जी का ।

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एक दिन पहले

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