कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस पार्टी का रुख पहले की तुलना में ज्यादा वामपंथी हुआ है, ताकि वह भारतीय जनता पार्टी की विभाजनकारी राजनीति का मुकाबला कर सके। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में थरूर ने कहा कि उनकी पार्टी अब नीतियों और विचारधारा के स्तर पर ज्यादा वाम झुकाव रखती है, जबकि मनमोहन सिंह के दौर में कांग्रेस ज्यादा केन्द्रवादी रुख अपनाती थी।
उन्होंने कहा अगर आप डॉ. मनमोहन सिंह के समय की कांग्रेस देखें, तो वह ज्यादा सेंटरिस्ट थी। लेकिन अब पार्टी ने सामरिक और वैचारिक दोनों स्तर पर वाम की ओर झुकाव दिखाया है। यह बदलाव या तो रणनीतिक है या वैचारिक, यह अभी देखना बाकी है। थरूर ने कहा कि 1991 से 2009 तक देश की राजनीति में एक सेंटरिस्ट फेज देखा गया, जब कांग्रेस और भाजपा दोनों ने कुछ समान आर्थिक नीतियां अपनाईं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में कांग्रेस ने खुद को आम जनता के मुद्दों से जोड़ते हुए वाम झुकाव बढ़ाया है।
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थरूर ने यह बातें रैडिकल सेंट्रिज़्म: माय विजन फॉर इंडियाविषय पर दिए गए व्याख्यान में कहीं। उन्होंने यह भी कहा कि आंतरिक लोकतंत्र हर राजनीतिक दल में जरूरी है और किसी भी पद पर अनिश्चितकाल तक बने रहना गलत है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे दोबारा AICC अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेंगे, तो थरूर ने कहा कि अभी ऐसी कोई संभावना नहीं दिखती, हालांकि वे खुश हैं कि कांग्रेस में एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया मौजूद है।
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इसके अलावा, अमेरिका के बयान पर कि विदेशी कुशल श्रमिक अमेरिका में काम कर अमेरिकियों को प्रशिक्षित करें और फिर लौट जाएं, इस पर थरूर ने कहा भारत को इससे कोई आपत्ति नहीं। हम चाहते हैं कि हमारे लोग बाहर अनुभव लें और फिर भारत लौटकर देश की प्रगति में योगदान दें।



