रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिन के दौरे पर भारत आए। पुतिन के इस दौरे पर दुनियाभर की नजर टिकी हुई थी। ट्रंप के टैरिफ की धमकियों और रूस पर लगे प्रतिबंधों के बीच दोनों देशों के लिए यह दौरा कितना मायने रखता है? पुतिन के इस दौरे से दुनिया के वर्ल्ड ऑर्डर पर क्या असर पड़ सकता है? इन सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, राकेश शुक्ल, अजय सेतिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
समीर चौगांवकर: 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, तब से दुनियाभर के नेताओं से उनके रिश्ते अच्छे रहे हैं। रूस के साथ भारत का तो पुराना संबंध रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के बारे में रूस का यह कहना कि पीएम मोदी अगर हस्तक्षेप करेंगे तो यूक्रेन के साथ युद्ध रुक सकता है। वहीं, जेलेस्की का भी यही कहना कि पीएम मोदी के हस्तक्षेप से युद्ध रुक सकता है यह उनके स्वीकार्यता को बताता है। इस वक्त रूस का भारत आना प्रधानमंत्री मोदी के लिए बड़ी चुनौती होगी। दुनिया के तमाम देशों के रूस के खिलाफ खड़े होने के बाद भी भारत का पुतिन को बुलाना बड़ा कदम है। चार साल बाद वो लौटे हैं। भविष्य में क्या ऐसा कोई गठजोड़ बन सकता है जिसमें रूस चीन और भारत हों यह देखना होगा। इस दौरे का असर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।
अजय सेतिया: राष्ट्रपति पुतिन का जिस प्रकार स्वागत हुआ यह देखना होगा। इससे दुनिया को एक संदेश गया है। जिस प्रकार ट्रंप पिछले एक साल से भारत और प्रधानमंत्री मोदी के बारे में टिप्पणी कर रहे हैं। भारत को धमकियां दे रहे हैं। इन सबके बीच में जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत किया वो ‘सौ सुनार की एक लोहार की’ वाली कहावत को चरितार्थ करता है। इससे उन्होंने ट्रंप को सीधा संदेश दे दिया है।
राकेश शुक्ल: डोनाल्ड ट्रंप का स्वभाव पुराने समय में दुकान पर बैठने वाले सेठ की तरह जो ग्राहकों पर चिड़चिड़ाता था। उस सेठ को प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब दे दिया है। आर्थिक और समारिक दोनों दृष्टि से रूस और भारत के रिश्ते पांच दशक से ज्यादा पुराने हैं। दोनों के रिश्ते में जो मजबूती है वो अमेरिका को खल रही है। इससे भारत रूस और रूस के माध्यम से चीन भी भारत के करीब आ गया है।
ये भी पढ़ें:Trade Agreement:भारत-यूएस के व्यापार समझौते पर शुरू होगी बातचीत, जल्द दिल्ली आएगा अमेरिकी दल
अनुराग वर्मा: राहुल गांधी की नाराजगी ठीक है लेकिन आपने खुद को उस स्थिति में पहुंचाया है। पुतिन ने भारत की ग्रोथ को जादूई ग्रोथ बताया है। वो अपने आप में एक बहुत बड़ा संदेश है। पुतिन का यह कहना जिस तरह ट्रंप को मैटर करते हैं उसी तरह से भारत के विपक्ष को भी मैटर करते हैं।
विनोद अग्निहोत्री: जो दुनिया का नया वर्ल्ड ऑर्डर तैयार हो रहा है वो ईस्टर्न वर्ल्ड ऑर्डर है जो तैयार हो रहा है। जब दुनिया शीत युद्ध में थी तब भी हम दोनों पक्षों में शामिल हुए बिना दोनों पक्षों के साथ हमारे बेहतर रिश्ते रहे थे। पिछले चार दशक से हमारे रिश्ते अमेरिका से बेहतर हो रहे थे, लेकिन ट्रंप ने आकर उसे झटका दिया है। भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के निर्माण में रूस का योगदान अतुलनीय रहा है। रूस अगर साथ में है तो कहीं न कहीं हम चीन को न्यूट्रलाइज कर सकते हैं। और अगर चीन न्यूट्रलाइज हुआ तो पाकिस्तान भी न्यूट्रलाइज होगा। मुझे लगता है कि कूटनीतिक दृष्टि से, रक्षा संबंधों की दृष्टि से यह दौरा के बड़ी उपलब्धि साबित होगा।
