पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। कोलकाता में बूथ लेवल ऑफिसर चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुर्शिदाबाद में राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राजनीतिक बयानबाजी पर कड़ी चेतावनी दी है। एसआईआर प्रक्रिया के बीच प्रशासनिक दबाव, राजनीतिक आरोप और ग्राउंड लेवल कर्मचारियों की परेशानियों ने पूरे मुद्दे को और गर्मा दिया है।
कोलकाता में बीएलओ ने फॉर्म की त्रुटियों, मतदाता जागरूकता की कमी और डिजिटल प्रक्रिया की दिक्कतों को लेकर विरोध जताया। बीएलओ संजीव मुखर्जी ने बताया कि मतदाता फॉर्म के बारे में जानकारी न होने से बार-बार गलतियां कर रहे हैं, जिससे बीएलओ का काम बेहद बढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग लगातार दबाव तो बना रहा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करता कि जमीनी स्तर पर क्या और कैसे करना है। इसी बीच, मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर के बयान पर राज्यपाल ने सख्त टिप्पणी दी।
राज्यपाल की सख्त चेतावनी
राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि असली बंगाल उतना ही शांत है जितना कि बर्फ से ढका कंचनजंघा, लेकिन राजनीतिक बंगाल ज्वालामुखी की तरह है।नउन्होंने आगाह किया कि किसी को भी समाज में हिंसा भड़काने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे पर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उसे सर्वोच्च न्यायालय पहले ही सुलझा चुका है और उसके खिलाफ जाना लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने इसे ‘जनता का अपमान, भारत का अपमान और कानून का अपमान’ बताया।
ये भी पढ़ें-राष्ट्रीय संविधान दिवस समारोह कल; राष्ट्रपति करेंगी अध्यक्षता, पीएम भी होंगे शामिल
सरहद पर स्थिति का जायजा
राज्यपाल मुर्शिदाबाद के भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और BSF जवानों से बातचीत की। उन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा की स्थिति और निवासियों की समस्याओं को समझने की कोशिश की। राज्यपाल का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ा है और SIR प्रक्रिया को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
बीएलओ पर कार्यभार का भारी दबाव
प्रदर्शन कर रहे बीएलओ का कहना है कि फॉर्म भरने में मतदाता लगातार गलतियां करते हैं क्योंकि उन्हें प्रक्रिया का ज्ञान नहीं दिया गया है। इससे बीएलओ को कई-कई बार घर जाना पड़ता है। संजीव मुखर्जी ने कहा कि डिजिटल प्रक्रिया सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि डेटा एंट्री में भारी समय लगता है और तकनीकी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने हर क्षेत्र में एक डेटा एंट्री ऑपरेटर नियुक्त करने की मांग की।
सरल समाधान की अपील
बीएलओ ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए और मतदाताओं को पर्याप्त जागरूक करना जरूरी है। उनका कहना है कि नियम स्पष्ट नहीं हैं, जिससे कार्यवाही के दौरान भ्रम की स्थिति बनी रहती है। बीएलओ ने प्रशासन से एसआईआर प्रक्रिया के नियमों को पारदर्शी बनाने, तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने और सभी कर्मचारियों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि आयोग उनकी समस्याओं पर जल्द ध्यान देगा।



