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Bihar: अब किस नेता ने छोड़ा राजद? लालू के दिल्ली और तेजस्वी के विदेश जाते ही पार्टी में भगदड़

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Bihar: अब किस नेता ने छोड़ा राजद? लालू के दिल्ली और तेजस्वी के विदेश जाते ही पार्टी में भगदड़

बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद राष्ट्रीय जनता दल के कुनबे में मची रार थमने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव 4 दिसंबर सेविदेश यात्रापरहैं, वहीं दूसरी तरफ राजद के राष्ट्रीय अध्यक्षलालूप्रसाद यादव दिल्ली में हैं। नतीजतनबिहार में उनकी पार्टी बिखरने लगीहै। दिग्गज नेताओं नेइस्तीफे की झड़ी लगा दी है। साथ ही उन नेताओं नेपार्टी के ‘A to Z’ के नारे और नेतृत्व की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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पूर्व डीजी अशोक गुप्ता ने दिया इस्तीफा,लगाए गंभीर आरोप

पार्टी को ताजा और बड़ा झटका पूर्व डीजी अशोक कुमार गुप्ता ने दिया है। उन्होंने राजद बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अपना त्यागपत्र प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को भेजते हुए उन्होंने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर कड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा किपार्टी में अब कार्यकर्ताओं के सम्मान की परंपरा खत्म हो गई है।शीर्ष नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच गहरी खाई पैदा हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि राजद में ‘ए-टू-जेड’ और सामाजिक न्याय का नारा सिर्फ दिखाने के लिए लगाया और कहा जाता है। वास्तविकता यह है कि टिकट वितरण में ऐसे सिद्धांतों को ताक पर रख दिया जाता है।

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विजय कृष्ण के जाने से गहराया संकट

अशोक गुप्ता से पहले राजद के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद विजय कृष्ण भी पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। 74 वर्षीय विजय कृष्ण ने लालू प्रसाद यादव को इस्तीफा भेजकर सक्रिय राजनीति से संन्यास की बात कही थी। और अब अशोक गुप्ता ने भी पार्टी को बाय-बाय कर दिया है।राजद छोड़ने के बाद अशोक गुप्ता कहाँ जाएंगे इस बात का खुलासा उन्होंने अभी नहीं किया है। लेकिन उन्होंने इतना जरुर कहा कि ‘खरमास’ के बाद वे अपने अगले कदम का फैसला लेंगे, जिसके बाद उनके किसी दूसरे दल में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।

नेतृत्व पर उठते सवाल

सियासी जानकारों का मानना है कि जहां एक ओर लालू प्रसाद यादव दिल्ली चले गये, वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव 4 दिसंबर से विदेश यात्रा परहैं। ऐसे मेंतेजस्वी यादव की अनुपस्थिति और हार के बाद का सन्नाटा कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ रहा है। पुराने और अनुभवी नेताओं का एक-एक कर साथ छोड़ना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर असंतोष की जड़ें बहुत गहरी हो चुकी हैं।

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