Home Bihar News Bihar: पटना के प्रोफेसर लीबिया में फंसे, वीजा खत्म, लगाई मानवाधिकार आयोग...

Bihar: पटना के प्रोफेसर लीबिया में फंसे, वीजा खत्म, लगाई मानवाधिकार आयोग से मदद की पुकार

0
Bihar: पटना के प्रोफेसर लीबिया में फंसे, वीजा खत्म, लगाई मानवाधिकार आयोग से मदद की पुकार

बिहार की राजधानी पटना के राजेंद्र नगर के रहने वाले प्रो. डॉ. संजीव धारी सिन्हा लीबिया में फँस गए हैं। अफ्रीकी देश लीबिया में अंग्रेजी विषय के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत संजीव धारी का वीजा समाप्त हो चुका है। उन्होंने वीडियो जारी कर भारत वापस लाने की गुहार लगाई है, जिसके बाद उनकी मदद के लिए मानवाधिकार आयोग में अर्जी दायर की गई है।

जानकारी के अनुसार, प्रो. डॉ. संजीव धारी सिन्हा लीबिया की यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं और वर्ष 2014 से ही भारत आने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक अपने वतन वापस नहीं लौट सके हैं। बताया जा रहा है कि वे भारतीय दूतावास की लापरवाही का खामियाज़ा भुगत रहे हैं।

पीड़ित के अनुसार, त्रिपोली यूनिवर्सिटी में 2014-15 और 2015-16 में लगातार सेवा देने के बावजूद जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी नहीं की गई। वीज़ा संबंधी समस्याओं के कारण 2017 में त्रिपोली यूनिवर्सिटी ने उन्हें 39 माह की बजाय सिर्फ 21 माह का वेतन दिया, जो वीज़ा अवधि खत्म होने के कारण हवाला के दायरे में आता है। यहां तक कि अलमेरगिब यूनिवर्सिटी में सेवा के दौरान भी उन्हें वैध वीज़ा नहीं दिया गया। बिना वीज़ा विदेश में काम करना गैरकानूनी है, ऐसे में उनकी कमाई हुई राशि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत हवाला के दायरे में मानी जाएगी।

इस गंभीर स्थिति में प्रोफेसर सिन्हा ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा से फोन पर बात कर मदद की अपील की। इसके बाद अधिवक्ता एस.के. झा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली तथा बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। अधिवक्ता ने बताया कि किसी भी नागरिक का विदेश में इस प्रकार फँसा होना मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा ने कहा कि इस मामले में सरकार गंभीर नहीं है। उनके अनुसार, विशेष परिस्थितियों में पूर्व तिथि से वीज़ा देने का प्रावधान मौजूद है, लेकिन इसके लिए संस्थान और सरकार की सक्रियता आवश्यक है, जो इस मामले में दिखाई नहीं दे रही है। इसी कारण प्रो. सिन्हा की वतन वापसी संभव नहीं हो पा रही है।

पढे़ं:अतिक्रमण हटाने के बाद बेघर परिवारों का हंगामा, समस्तीपुर डीएम से लगाई न्याय की गुहार

हालांकि, लीबिया के उपशिक्षा मंत्री ने मामले में पहल की है और अलमेरगिब यूनिवर्सिटी ने उनका बकाया वेतन उनके अकाउंट में भेजने की अनुमति भी दी है, लेकिन भारतीय दूतावास की सुस्ती के चलते मामला अभी तक सुलझ नहीं सका है। प्रो. सिन्हा की भारत वापसी तब ही संभव है जब उन्हें पूरी अवधि के लिए वैध वीज़ा और लीगल एग्ज़िट उपलब्ध कराया जाएगा।

इसी बीच प्रो. डॉ. संजीव धारी सिन्हा ने भारत सरकार और बिहार सरकार से अपील की है कि उन्हें लीगल एग्ज़िट वीज़ा और सहायक प्रोफेसर होने का आधिकारिक प्रमाणपत्र दिलाया जाए। वे कहते हैं कि पैसा बाद में ले लेंगे, पहले उन्हें वैध एग्ज़िट दिलाया जाए ताकि वे घर वापस लौट सकें।

जानकारी के अनुसार, प्रो. सिन्हा लीबिया की राजधानी त्रिपोली से 80 किलोमीटर दूर खुम्स में रहते हैं और अलमेरगिब यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे हैं। उनके अनुसार, भारतीय मुद्रा में लगभग 1.5 करोड़ रुपये उनका बकाया है, लेकिन न उन्हें वेतन मिल रहा है और न ही लीगल वीज़ा। प्रोफेसर वर्ष 2009 में लीबिया गए थे और 2017 तक त्रिपोली यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर रहे। फिलहाल उनके पास न वैध वीज़ा है और न ही आई-कार्ड।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version