Sunday, February 1, 2026
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Bihar: 'वो परिवार के सदस्य जैसे लगे', जननायक के भतीजे ने PM से मुलाकात को लेकर क्या कहा, पढ़ें पूरा इंटरव्यू

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के माहौल में जहां सियासत गर्म है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अभियान की शुरुआत एक भावनात्मक स्पर्श के साथ की। शुक्रवार की सुबह समस्तीपुर का कर्पूरी ग्राम इतिहास का साक्षी बना, जब प्रधानमंत्री ने बिहार के समाजवादी पुरोधा और भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर के निवास पर पहुंचकर उन्हें नमन किया।

कर्पूरी ठाकुर की सादगी और सामाजिक न्याय की विचारधारा को सलाम करते हुए प्रधानमंत्री ने न केवल श्रद्धांजलि दी, बल्कि उस धरती को भी प्रणाम किया, जिसने भारत को “जननायक” दिया। इसी कड़ी में जननायक के भतीजे नित्यानंद ठाकुर से अमर उजाला ने बात की और उन्होंने कई सवालों के जवाब बड़ी बेबाकी से दिए।

सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार कर्पूरी ग्राम की धरती पर आए। इस मौके पर परिवार से क्या बातचीत हुई?

जवाब: सबसे पहले तो प्रधानमंत्री जी ने जननायक कर्पूरी ठाकुर की स्मृति में सुमन के दो फूल चढ़ाए। उन्होंने जननायक को भारत रत्न देने की घोषणा की थी, और उसे पूरा भी किया। इसके बाद उन्होंने हमें निमंत्रण दिया था कि आप सब परिवार के सदस्य दिल्ली आइए और मुलाकात कीजिए। हम सब परिवार गए, हमारे बड़े भैया रामनाथ ठाकुर जी, जो केंद्र में मंत्री हैं, भी साथ थे। दिल्ली में प्रधानमंत्री जी से बहुत अच्छी बातचीत हुई। उन्होंने कहा था कि वह कर्पूरी ग्राम की धरती पर आएंगे, जननायक को नमन करेंगे। और अब वे अपना वही वादा पूरा करने आए।

सवाल: यानी चुनावी माहौल से अलग, वो अपना वादा निभाने के लिए आए थे?

जवाब: जी हां, बिल्कुल। यह दौरा चुनावी मुद्दे से अलग था। प्रधानमंत्री जी अपनी तमन्ना पूरी करने आए थे, जननायक के चित्र पर माला अर्पित करने की। यही उनका असली उद्देश्य था।

सवाल: उस दिन प्रधानमंत्री जी जब आपके घर पहुंचे, तो क्या उस पल में कुछ खास था?

जवाब: बहुत ही अच्छा पल था। पहले भी अच्छी मुलाकात हुई थी, लेकिन इस बार तो और भी आत्मीयता महसूस हुई। प्रधानमंत्री जी करीब 25 मिनट तक हमारे बीच रहे। सबसे हालचाल पूछा, हमको पहचान भी गए। परिवार के हर सदस्य, पत्नी, बच्चे, नाती-नतिन सबसे बातें कीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मंत्री रामनाथ ठाकुर जी भी साथ थे। जब दोनों सभा स्थल पर चले गए, तब प्रधानमंत्री जी ने मुस्कुराते हुए कहा, “रामनाथ जी, ये आपका घर है, मैं आपको ही भगा रहा हूं।”

सवाल: प्रधानमंत्री मोदी के साथ चाय पर भी बातचीत हुई?

जवाब: जी हां, बिल्कुल। जब प्रधानमंत्री जी बाहर निकल रहे थे तो मैंने कहा, “सर, अगर जननायक की धरती पर एक कप चाय या पानी पी लेते तो बहुत अच्छा होता।” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “चाय बनी है क्या?” फिर हम सब रूम में चले गए। इस दौरान बच्चे, पत्नी, भैया की बेटी और नतनी भी थीं। प्रधानमंत्री जी ने सबकी पढ़ाई-लिखाई के बारे में पूछा। करीब 15 मिनट तक बातचीत चली। उन्होंने पहले पानी पिया, फिर चाय पी, और जाते समय हंसते हुए धन्यवाद कहा।

सवाल: क्या उस पल में प्रधानमंत्री के बजाय एक पारिवारिक जुड़ाव ज्यादा महसूस हुआ?

जवाब: जी हां, बिल्कुल। उस समय लगा ही नहीं कि वे प्रधानमंत्री हैं। जैसे कोई अपने परिवार के बीच बैठा हो, वैसे ही सहज और मुस्कुराते हुए बातचीत की। बहुत अपनापन महसूस हुआ।

सवाल: प्रधानमंत्री जी गांव के लोगों से भी मिले?

जवाब: हां, जब वे गांव से लौट रहे थे तो गाड़ी की स्पीड बहुत धीमी रखी, लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे। रास्ते में हाथ जोड़कर, मुस्कुराते हुए सबका अभिवादन किया। लोग बहुत खुश थे। हेलीकॉप्टर तक जाते-जाते उन्होंने पूरे गांव के लोगों का अभिवादन किया।

सवाल: आप जननायक कर्पूरी ठाकुर के परिवार से हैं। बिहार की राजनीति में उनका नाम हमेशा लिया जाता है। क्या आपको लगता है कि सभी नेता उन्हें उतना सम्मान देते हैं, जितना देना चाहिए?

जवाब: सभी सम्मान देते हैं, लेकिन जो सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दिया है, वह सबसे अलग है। उनसे पहले कई सरकारें आईं, लेकिन किसी प्रधानमंत्री ने जननायक को भारत रत्न देने का काम नहीं किया। नरेंद्र मोदी जी ने कर्पूरी ठाकुर को सिर्फ़ भारत रत्न नहीं दिया, बल्कि “भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर” कहकर उनका दर्जा और ऊंचा किया। इससे बड़ा सम्मान कोई नहीं दे सकता।

सवाल: कर्पूरी ठाकुर जी की राजनीति और जीवन से आज के नेताओं को क्या सीखनी चाहिए?

जवाब: उन्होंने खुद झोपड़ी में जन्म लिया और वहीं से राजनीति की शुरुआत की। गांव, गरीब और पिछड़ों के लिए जीवन समर्पित कर दिया। ऊंचे तबके के लोगों से लेकर दबे-कुचले वर्ग तक, सबके लिए आरक्षण लागू किया। उन्होंने 36% आरक्षण दिया जिसमें पिछड़े, अति पिछड़े और हरिजन सभी शामिल हैं। जननायक सिर्फ एक नेता नहीं थे, वो न्याय, समानता और त्याग की मिसाल थे। अगर आज भी नेता उनके रास्ते पर चलें, तो बिहार ही नहीं, पूरा देश बदल सकता है।

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