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Bihar: बढ़ती भीड़ को देखते हुए 2030 तक बड़े शहरों में रेल संचालन क्षमता होगी दोगुनी, प्रदेश के ये स्टेशन शामिल

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Bihar: बढ़ती भीड़ को देखते हुए 2030 तक बड़े शहरों में रेल संचालन क्षमता होगी दोगुनी, प्रदेश के ये स्टेशन शामिल

यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण रेलवे ने बड़े शहरों में ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई है। लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक यह क्षमता दोगुनी कर दी जाए। ताकि यात्रियों को इसका लाभ जल्दी मिल सके, अगले पाँच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से क्षमता में वृद्धि की जाएगी और मौजूदा रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।

इसके तहत रेलवे मौजूदा टर्मिनलों पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, स्टेबलिंग लाइन, पिट लाइन और शंटिंग सुविधाएं विकसित करेगा। साथ ही शहरों और उनके आसपास नए टर्मिनल स्टेशन बनाए जाएंगे। ट्रेनों के बेहतर रखरखाव के लिए मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स तैयार किए जाएंगे। बढ़ती ट्रेनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाया जाएगा, नई रेल लाइनों का निर्माण होगा और मल्टीट्रैकिंग के माध्यम से सेक्शन की क्षमता बढ़ाई जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया उपनगरीय और गैर-उपनगरीय दोनों तरह की रेल सेवाओं को ध्यान में रखकर की जाएगी।

देश के 48 प्रमुख शहरों के लिए एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है, जिसमें पूर्व मध्य रेल के पटना, गया, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, मुजफ्फरपुर और दरभंगा शामिल हैं। इस योजना में पहले से स्वीकृत, प्रस्तावित और नियोजित सभी कार्यों को शामिल किया जाएगा, ताकि तय समय सीमा में ट्रेनों की संचालन क्षमता को दोगुना किया जा सके। रेलवे का प्रयास है कि क्षमता में वृद्धि क्रमिक रूप से हो, जिससे बढ़ते यातायात का दबाव तुरंत कम किया जा सके।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि यात्रियों की बढ़ती मांग और भीड़ को देखते हुए विभिन्न शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार किया जा रहा है और परिचालन क्षमता बढ़ाई जा रही है। इससे रेलवे नेटवर्क का आधुनिकीकरण होगा और देशभर में कनेक्टिविटी बेहतर बनेगी।

इसी क्रम में पटना जंक्शन के पास हार्डिंग पार्क में 95 करोड़ रुपये की लागत से पाँच नए टर्मिनल प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं, जिनका शिलान्यास 30 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इनके बन जाने से पटना जंक्शन पर ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू होगा, टर्नअराउंड समय घटेगा और कंजेशन कम होगा। नया टर्मिनल भूमिगत मार्गों के जरिए सभी प्लेटफॉर्म को जोड़ेगा और निर्माणाधीन मेट्रो, सड़क मार्ग तथा मल्टी-मॉडल हब से सीधी कनेक्टिविटी देगा, जिससे यात्रियों को शहर के जाम से राहत मिलेगी। पहले से विकसित पाटलिपुत्र टर्मिनल भी पटना जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम करने में सहायक साबित हो रहा है।

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इसके अलावा पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से झाझा के बीच लगभग 400 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की योजना है, जिस पर करीब 17 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस परियोजना को कई छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इससे यात्री और मालगाड़ियों का संचालन आसान होगा, नई ट्रेनों के लिए रास्ता खुलेगा और क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

गया जंक्शन और पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण रेल केंद्रों पर क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। गया जंक्शन का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत व्यापक पुनर्विकास हो रहा है, क्योंकि यह बोधगया जैसे अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल का प्रमुख प्रवेश द्वार है। वहीं डीडीयू जंक्शन पर यार्ड रिमॉडलिंग, नई लाइनों और आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था से दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाना संभव होगा। मुजफ्फरपुर और दरभंगा स्टेशनों पर भी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत यात्री सुविधाओं, सुरक्षा और सुगमता को बेहतर बनाया जा रहा है।

कुल मिलाकर, इन सभी योजनाओं से आने वाले वर्षों में रेल यात्रा अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुचारू होगी, भीड़ में कमी आएगी और बिहार समेत पूरे क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

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