मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र स्थित कोल्हुआ पैगंबरपुर इलाके में संचालित फर्जी चिट फंड कंपनी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। मंगलवार को मजिस्ट्रेट की निगरानी में कंपनी के कार्यालय को सील कर दिया गया। इस दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती रही। पहले से लगे ताले को काटकर अंदर प्रवेश किया गया और ट्रेनिंग सेंटर की तलाशी ली गई, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण कागजात व दस्तावेज बरामद किए गए। कार्रवाई को देखने के लिए मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुटी रही। बताया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में नेपाल के विभिन्न जिलों के कई युवक भी शिकार बने हैं। पुलिस अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
पीड़ितों ने बताया कि उन्हें सोशल साइट्स पर नौकरी का विज्ञापन दिखा था। दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर उन्हें कार्यालय बुलाया गया। कुछ लोगों को कंपनी की ओर से कॉल भी आई थी। अधिक वेतन का लालच देकर कार्यालय पहुंचने पर रजिस्ट्रेशन के नाम पर प्रति व्यक्ति 12 हजार रुपये लिए गए। इसके बाद रुचि के अनुसार ट्रेनिंग कराई गई और नौकरी देने का वादा किया गया। दस्तावेजतैयार करने के नाम पर 25-25 हजार रुपये और बाद में ज्वाइनिंग से पूर्व दो-दो लाख रुपये जमा कराए गए।
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जब ट्रेनिंग पूरी होने के बाद युवकों ने नौकरी की जानकारी मांगी तो कंपनी के लोगों ने उन्हें कार्यालय से भगा दिया। पीड़ित रंजीत कापड़ द्वारा अहियापुर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पैगंबरपुर स्थित कार्यालय पर छापेमारी की और मौके से चार कर्मचारियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सिटी एसपी (कोटा) किरण कुमार ने बताया कि नेपाल निवासी रंजीत कापड़ की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। चारों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है। जिस मकान में फर्जी कंपनी चलाई जा रही थी, उसे मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में सील कर दिया गया है। मकान मालिक की तलाश जारी है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कुल कितने लोग इस ठगी का शिकार बने हैं। मामले की जांच और अनुसंधान जारी है।
