मतदाताओं के एक दूसरे वर्ग के लिए झंझारपुर दशकों से विश्वासघात की कहानी है। कई लोग जर्जर सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर इशारा करते हैं, जो उनके मुताबिक सरकार के वादों की विफलता को दर्शाते हैं। चौथी बार विधायक बने नीतीश मिश्रा सड़क किनारे बैठकें कर मतदाताओं से अपने पांच साल के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें फिर से चुनने की अपील करने में व्यस्त हैं। बीजेपी विधायक और प्रत्याशी नीतीश मिश्रा को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राम नारायण यादव कड़ी टक्कर दे रहे हैं। यादव अपने प्रचार अभियान के दौरान युवाओं में बेरोज़गारी को इस चुनाव का मुख्य मुद्दा बना रहे हैं। वो मतदाताओं से पलायन रोकने और लोकल रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए वोट मांग रहे हैं। झंझारपुर विधानसभा सीट पर दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होगा, जिसके परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025: क्या कहता है झंझारपुर सीट का समीकरण?
उत्तर बिहार में मधुबनी जिला मुख्यालय से लगभग एक घंटे पूर्व की ओर गाड़ी चलाते हुए हरे-भरे उपजाऊ खेत आने वालों का स्वागत करते हैं। ये झंझारपुर है, जो सूबे के मिथिला क्षेत्र में आता है और ये इलाका कभी कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री रहे जगन्नाथ मिश्र का गढ़ हुआ करता था। ये इलाका अपने ऐतिहासिक मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ हाल ही में तेजी से उभरते हुए शहरीकरण के लिए मशहूर है। मौजूदा वक्त में इस विधानसभा सीट पर दिवंगत जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा का कब्जा है, जिन्होंने 2020 में बीजेपी के टिकट पर यहां से जीत दर्ज की थी। यहां रहने वाले लोग बुनियादी ढांचे को बेहतर विकास के लिए विधायक नीतीश मिश्रा द्वारा शुरू की गई अलग-अलग विकास परियोजनाओं को श्रेय देते हैं। झंझारपुर निवासी अजीत कुमार झा बोले- “बाबा बिदेश्वर स्थान हमारे नजदीक में है। माननीय मंत्री जी पर्यटन स्थल से उसमें भी काम करवा रहे हैं और बगल में ही शांतिनाथ महादेव मंदिर है। वहां भी काम लगभग पूरा होने ही वाला है। बायोडाइवर्सिटी पार्क का जो काम है, वो भी पूरा होने जा रहा है। उसके बाद बहुत सारे ऐसे काम हैं जो किए हैं। मेडिकल कॉलेज लाए हैं। उसके बाद अभी केंद्रीय विद्यालय लाए हैं। बहुत सारा काम है।
