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Bihar Cyber Fraud: पूर्णिया में निजी डेटा चोरी और क्रिप्टो नेटवर्क से दो करोड़ की ठगी, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

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Bihar Cyber Fraud: पूर्णिया में निजी डेटा चोरी और क्रिप्टो नेटवर्क से दो करोड़ की ठगी, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

पूर्णिया में साइबर अपराध के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें निजी डेटा की चोरी और अवैध क्रिप्टो करेंसी के जरिए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था। गुप्त सूचना के आधार पर एसटीएफ, आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), साइबर थाना और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई को साइबर सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

मुफस्सिल थाना क्षेत्र से आरोपी की गिरफ्तारी

पुलिस ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रहने वाले राकेश मंडल को गिरफ्तार किया है। उसके पास से भारी मात्रा में अवैध संपत्ति और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। जब्त सामग्री में लगभग दो करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टो करेंसी, जो करीब 1 लाख 90 हजार अमेरिकी डॉलर के बराबर है, इसके अलावा 2 लाख 80 हजार रुपये नकद, 9 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक मैकबुक, एक आईपैड और विभिन्न बैंकों की पासबुक शामिल हैं। बरामदगी की मात्रा से गिरोह की गतिविधियों के व्यापक स्तर का अंदाजा लगाया जा रहा है।

गुप्त सूचना से खुली डेटा लीक वेबसाइट की पोल

मामले की जानकारी देते हुए एएसपी आलोक रंजन ने बताया कि साइबर वर्ल्ड की संवेदनशील सामग्रियों की जांच करने वाली संस्था ‘सारथी’ के माध्यम से पुलिस मुख्यालय को इस अवैध नेटवर्क की गुप्त सूचना मिली थी। जांच के दौरान यह सामने आया कि गिरोह Proxyearth.org नामक एक वेबसाइट का संचालन कर रहा था। यह वेबसाइट बेहद खतरनाक थी, क्योंकि इसमें किसी भी व्यक्ति का मोबाइल नंबर डालते ही उसका निजी डेटा, जिसमें मुख्य और वैकल्पिक नंबर शामिल थे, सार्वजनिक हो जाते थे।

टेलीग्राम चैनल से खरीदा जाता था निजी डेटा

सख्ती से की गई पूछताछ में राकेश मंडल ने खुलासा किया कि वे ‘डीडीसी ग्रुप’ नामक टेलीग्राम चैनल से थोक में लोगों का निजी डेटा खरीदते थे। इसके बाद उसी डेटा का उपयोग इस वेबसाइट के जरिए अवैध रूप से किया जाता था। इस नेटवर्क के माध्यम से लोगों की निजता को गंभीर रूप से खतरे में डाला गया था।

प्रतिबंधित एप्स के प्रमोशन से कमाई

जांच में यह भी सामने आया कि राकेश मंडल वर्ष 2024 से अपने टेलीग्राम चैनल के जरिए विभिन्न गेमिंग एप्स का प्रमोशन कर रहा था। इनमें भारत में प्रतिबंधित ‘तिरंगा एप’ जैसे प्लेटफॉर्म भी शामिल थे। इन अवैध प्रमोशनों से अर्जित धनराशि को वह क्रिप्टो करेंसी में बदल देता था, ताकि लेनदेन को छिपाया जा सके।

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क्रिप्टो से नकद तक का पूरा नेटवर्क

राकेश ने अपने फरार साथियों रोहन और रौनक की मदद से उनके सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल कर क्रिप्टो करेंसी को नकद में बदलने की व्यवस्था बना रखी थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह ने अपना खुद का क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज एप भी विकसित कर लिया था, जिससे अवैध धन के लेनदेन को और आसान बनाया जा सके।

फरार आरोपियों की तलाश और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन की जांच

फिलहाल राकेश मंडल को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्य रोहन और रौनक अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस इस बात की भी गहन जांच कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में क्रिप्टो करेंसी का स्रोत क्या था और क्या इस नेटवर्क के तार किसी अंतर्राष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग गिरोह से जुड़े हुए हैं।

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