सुपौल की सभी पांच विधानसभा सीटों पर दूसरे चरण में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर नामांकन प्रक्रिया सोमवार को संपन्न हो गई। जिसके बाद मंगलवार को नामांकन पत्रों की संवीक्षा की गई। जिले के सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों में कुल 57 अभ्यर्थियों ने नामांकन दाखिल किया था। जिसमें पिपरा में सर्वाधिक 22 अभ्यर्थी शामिल थे। इसमें से 08 अभ्यर्थियों का नामांकन मंगलवार को अलग-अलग कारणों से रद्द कर दिया गया है।
वहीं अन्य विधानसभा सीटों पर सभी नामांकन स्वीकृत कर लिए गए हैं। इस प्रकार कुल 49 नामांकन पत्र स्वीकृत किए गए हैं। इसमें पिपरा में सर्वाधिक 14 और त्रिवेणीगंज (आरक्षित) में सबसे कम 05 अभ्यर्थी चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा निर्मली में 08, सुपौल में 09 और छातापुर में 13 अभ्यर्थी शामिल हैं। पिपरा में जिन अभ्यर्थियों का नामांकन रद्द हुआ है, उसमें निर्दलीय शुरवीर कलाधर, कारी प्रसाद यादव, बलराम प्रसाद आजाद, गंगा राम शर्मा व राकेश रोशन सहित प्राउटिस्ट ब्लॉक इंडिया की कविता कुमारी, आम आदमी पार्टी के रविशंकर कुमार तथा जागरुक जनता पार्टी के भगवान लाल शर्मा शामिल हैं। अब नामांकन वापसी 23 अक्टूबर तक होगी। जिसके बाद अभ्यर्थियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।
इन विधानसभा क्षेत्रों में ये मुख्य अभ्यर्थी होंगे मैदान में
सुपौल में जदयू के मौजूदा विधायक सह मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, कांग्रेस के मिन्नतुल्लाह रहमानी और जनसुराज पार्टी के अनिल कुमार सिंह चुनाव मैदान में हैं। वहीं निर्मली में जदयू के मौजूदा विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, राजद के पूर्व आईआरएस बैद्यनाथ मेहता और जनसुराज पार्टी से निर्मली प्रखंड प्रमुख रामप्रवेश कुमार यादव के बीच मुकाबला होगा। पिपरा में जदयू के मौजूदा विधायक रामविलास कामत, भाकपा माले के अनिल कुमार यादव और जनसुराज पार्टी के जिलाध्यक्ष इंद्रदेव साह के बीच मुकाबला होगा।
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वहीं त्रिवेणीगंज (आरक्षित) सीट पर जदयू की सोनम रानी, राजद के जिलाध्यक्ष संतोष सरदार और जनसुराज पार्टी के प्रदीप राम चुनाव मैदान में हैं। जबकि छातापुर से भाजपा के मौजूदा विधायक सह मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू, राजद के डॉ बिपिन कुमार सिंह और जनसुराज पार्टी के अभय कुमार सिंह मुन्ना के बीच मुख्य मुकाबला होगा।
क्या खेल बिगाड़ेंगे बागी या वापस लेंगे नामांकन
संवीक्षा के बाद सामने आई अभ्यर्थियों की सूची ने पिपरा विधानसभा के एनडीए और महागठबंधन प्रत्याशियों की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, पिपरा से बिहार सरकार में पूर्व मंत्री रहे स्व विनायक प्रसाद यादव की पौत्रवधू कविता कुमारी और भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला महामंत्री रहे लक्ष्मीकांत भारती ने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है। लक्ष्मीकांत तुलापट्टी पंचायत से 20 वर्ष तक लगातार मुखिया रहे। हालांकि, बीते पंचायत चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वही कविता के पति विवेक यादव छात्र राजद जिलाध्यक्ष, युवा राजद जिला उपाध्यक्ष और राजद जिला महासचिव रहे हैं।
वहीं विवेक के पिता प्रो विजय कुमार यादव भी राजद के जिलाध्यक्ष व प्रदेश महासचिव रहे हैं। जबकि दादा स्व विनायक प्रसाद यादव सोशलिस्ट पार्टी और भारतीय लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष रहे। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल गए विनायक ने बाद के दिनों में कई बार विधानसभा का सफर तय किया। इस दौरान उन्होंने मंत्री का जिम्मा भी संभाला। वही वर्ष 1977 में सहरसा लोकसभा सीट से भारतीय लोक दल की टिकट पर सांसद भी निर्वाचित हुए।
ऐसे में इन दोनों प्रत्याशियों पर एनडीए और महागठबंधन के साथ ही आम लोगों की नजर भी टिकी हुई है। चर्चा यह है कि दोनों प्रत्याशी गुरुवार तक नामांकन वापस लेंगे या किसी का खेल बिगाड़ेंगे। हालांकि, इस बीच महागठबंधन के लिए एक राहत की खबर यह है कि राजद के जिला उपाध्यक्ष रहे कारी प्रसाद यादव का नामांकन रद्द हो गया है। कारी की बहु अदिति रीस्वाती दीनापट्टी पंचायत की मुखिया हैं। ऐसे में निगाहें उन पर भी हैं कि कारी अपना समर्थन किसे देते हैं।



