गोपालगंज जिले के भोरे बाजार और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं को विदेश में अच्छी नौकरी, मोटी सैलरी और बेहतर जीवन का लालच देकर अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के हाथों बेचने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। चीन और पाकिस्तान से संचालित साइबर फ्रॉड कंपनियां भारत के एजेंटों के जरिए युवकों को थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम भेज रही हैं, जहां से उन्हें म्यांमार ले जाकर अवैध साइबर कैंपों में कैद किया जा रहा है। इन्हीं में भोरे गांव का युवक प्रशांत कुमार पटेल भी शामिल है, जिसे थाईलैंड में तीन लाख रुपये में बेच दिया गया।
प्रशांत के अनुसार, 12 सितंबर को भोरे प्रखंड के डूमर नरेंद्र गांव के संजीव कुमार सिंह उर्फ मुन्ना और राजीव कुमार सिंह उर्फ टुन्ना उसके घर पहुंचे और थाईलैंड में ऊँचे वेतन वाली नौकरी का ऑफर दिया। बेरोजगार होने के कारण प्रशांत ने तुरंत हामी भर दी और अपना पासपोर्ट सौंप दिया। 29 सितंबर को वह लखनऊ से बैंकॉक पहुंचा, जहां एक एजेंट ने उसे रिसीव किया। थोड़ी देर बाद उसे एक अज्ञात स्थान पर कैद कर लिया गया और फिर कीचड़ व जंगलों के रास्ते म्यांमार ले जाया गया। वहां उसे साइबर क्राइम के अवैध कैंप में डाल दिया गया।
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प्रशांत ने बताया कि उसे पता चला कि उसे तीन लाख रुपये में सप्लाई किया गया है। वहां भारत के 300 से अधिक युवक मौजूद थे, जिन्हें विदेश में तेजी से पैसा कमाने का सपना दिखाकर फंसाया गया था। सभी को खराब भोजन, डर और सख्त निगरानी में रखा जाता था। इस बीच 23 अक्टूबर को म्यांमार आर्मी ने पूरे क्षेत्र को खाली कराने के लिए बड़ी कार्रवाई शुरू की। अफरा-तफरी में प्रशांत सहित कई युवक किसी तरह भागकर वापस थाईलैंड पहुंचे और वहां थाई आर्मी से संपर्क किया। थाई अधिकारियों ने तुरंत भारतीय दूतावास को सूचना भेजी। मानव तस्करी और अवैध फंडिंग के खतरे को देखते हुए थाईलैंड सरकार ने सीधे भारत सरकार से बात की।
इसके बाद 6 नवंबर को भारत सरकार ने विशेष विमान भेजकर 270 युवकों को वापस देश लाया। नई दिल्ली में सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने प्रारंभिक पूछताछ की, जिसके बाद बिहार आर्थिक एवं साइबर अपराध विभाग की टीम उन्हें पटना लेकर आई और औपचारिकताओं के बाद गृह जिलों में भेज दिया गया। इस पूरे मामले पर भोरे थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। पीड़ित के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
