बिहार सरकार की पहल से असम में बंधक बनाए गए छपरा जिले के सात प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी हो गई है। सभी मजदूरों के गांव पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार, सारण जिले के ये सात मजदूर असम के तीनसुकिया जिले के मारग्रेटा अंतर्गत लिड्डू गांव स्थित एक चिमनी भट्ठा पर मजदूरी करने गए थे। आरोप है कि चिमनी भट्ठा के मालिक कौशल सिंह ने उन्हें बंधक बनाकर बंधुआ मजदूर की तरह काम कराया। मजदूरों ने किसी तरह इस बात की जानकारी अपने परिजनों को दी, जिसके बाद मामला सामने आया।
डिप्टी सीएम से की गई थी मदद की अपील
परिजनों ने इसकी सूचना स्थानीय कैतुका नंदन पंचायत के मुखिया सह मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय को दी। इसके बाद मुखिया मिथिलेश राय ने राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, श्रम संसाधन मंत्री संजय सिंह टाइगर वश्रम संसाधन विभाग के सचिव एवं सारण के पूर्व जिलाधिकारी दीपक आनंद से संपर्क कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
मुखिया मिथिलेश कुमार राय ने बताया कि श्रम संसाधन विभाग के सकारात्मक प्रयास और असम पुलिस प्रशासन के सहयोग से सभी सातों मजदूरों की सुरक्षित वापसी संभव हो सकी। मजदूर गजेंद्र कुमार महतो और सुरेश राम सहित अन्य ने सरकार और प्रशासन की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि समय पर पहल नहीं होती तो उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
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घर लौटकर प्रवासी मजदूरों ने ली राहत की सांस
मुखिया ने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पंचायत स्तर पर प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण और ठेकेदारों से पंचायत के माध्यम से बंधपत्र बनाना आवश्यक है, ताकि मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इसकार्य के लिए प्रवासी मजदूरों ने बिहार सरकार, श्रम संसाधन विभाग के मंत्री, विभागीय सचिव दीपक आनंद और मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
