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Mann ki Baat LIVE: ‘ऑपरेशन सिंदूर हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक बन गया’, मन की बात में बोले पीएम मोदी

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Mann ki Baat LIVE: 'ऑपरेशन सिंदूर हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक बन गया', मन की बात में बोले पीएम मोदी

11:53 AM, 28-Dec-2025

2026 की दी शुभकामनाएं

साथियो, 2025 में ‘मन की बात’ का ये आखिरी एपिसोड है, अब हम साल 2026 में ऐसे ही उमंग और उत्साह के साथ, अपनेपन के साथ अपने ‘मन की बातों’ को करने के लिए ‘मन की बात’ के कार्यक्रम में जरूर जुड़ेंगे। लोगों से मिलने वाले सुझाव और इस दिशा में उनके प्रयासों को देखकर ये विश्वास और मजबूत होता है और जब ये सब बातें मेरे तक पहुँचती हैं, तो ‘विकसित भारत’ का संकल्प जरूर सिद्ध होगा | ये विश्वास दिनों दिन मजबूत होता जाता है ।

साल 2026 इस संकल्प सिद्धि की यात्रा में एक अहम पड़ाव साबित हो, आपका और आपके परिवार का जीवन खुशहाल हो, इसी कामना के साथ इस episode में विदाई लेने से पहले मैं जरूर कहूँगा, ‘Fit India Movement’ आप को भी फिट रहना है | ठंडी का ये मौसम व्यायाम के लिए बहुत उपयुक्त होता है, व्यायाम जरूर करें | आप सभी को 2026 की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

11:52 AM, 28-Dec-2025

कच्छ के रणोत्सव के बारे में की बात

मणिपुर के चुराचांदपुर में मारग्रेट रामथरसेम जी के प्रयास ऐसे ही हैं। उन्होंने मणिपुर के पारंपरिक उत्पादों को, वहाँ के हैंडीक्राफ्ट को, बांस और लकड़ी से बनी चीजों को, एक बड़े विजन के साथ देखा और इसी विजन के कारण, वो एक हैंडीक्रफ्ट से लोगों के जीवन को बदलने का माध्यम बन गईं। आज मारग्रेट जी की यूनिट उसमें 50 से ज्यादा कलाकार काम कर रहे हैं और उन्होंने अपनी मेहनत से दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में, अपने उत्पादों का एक बाजार भी विकसित किया है। मणिपुर से ही एक और उदाहरण सेनापति जिले की रहने वाली चोखोने क्रिचेना जी का है | उनका पूरा परिवार परंपरागत खेती से जुड़ा रहा है | क्रिचेना ने इस पारंपरिक अनुभव को एक और विस्तार दिया | उन्होंने फूलों की खेती को अपना जुनून बनाया |

इन दिनों कच्छ के रण में उत्सव चल रहा है | इस साल कच्छ रणोत्सव का ये आयोजन 23 नवंबर से शुरु हुआ है, जो 20 फरवरी तक चलेगा | यहां कच्छ की लोक संस्कृति, लोक संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प की विविधता दिखाई देती है। कच्छ के सफेद रण की भव्यता देखना अपने आप में एक सुखद अनुभव है। रात के समय जब सफेद रण के ऊपर चाँदनी फैलती है, वहां का दृश्य अपने आप में मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। रण उत्सव का टेंट सिटी बहुत लोकप्रिय है | मुझे जानकारी मिली है कि पिछले एक महीने में अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग रणोत्सव का हिस्सा बन चुके हैं और देश के कोने-कोने से आए हैं, विदेश से भी लोग आए हैं।

11:51 AM, 28-Dec-2025

समाज को सशक्त बनाने वाले लोगों का पीएम मोदी ने किया जिक्र

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारी पारंपरिक कलाएं समाज को सशक्त करने के साथ ही लोगों की आर्थिक प्रगति का भी बड़ा माध्यम बन रही हैं। आंध्र प्रदेश के नारसापुरम जिले की Lace Craft (लेस क्राफ्ट) की चर्चा अब पूरे देश में बढ़ रही है | ये लेस क्राफ्ट कई पीढ़ियों से महिलाओं के हाथों में रही है | बहुत धैर्य और बारीकी के साथ देश की नारी-शक्ति ने इसका संरक्षण किया है। आज इस परंपरा को एक नए रंग रूप के साथ आगे ले जाया जा रहा है | आंध्र प्रदेश सरकार और नाबार्ड मिलकर कारीगरों को नए डिजाइन सिखा रहे हैं, बेहतर स्किल ट्रेनिंग दे रहे हैं और नए बाजार से जोड़ रहे हैं। नारसापुरम लेस को GI Tag भी मिला है | आज इससे 500 से ज्यादा उत्पाद बन रहे हैं और ढ़ाई-सौ से ज्यादा गांवों में करीब-करीब 1 लाख महिलाओं को इससे काम मिल रहा है।

मणिपुर के चुराचांदपुर में मारग्रेट रामथरसेम जी के प्रयास ऐसे ही हैं। उन्होंने मणिपुर के पारंपरिक उत्पादों को, वहाँ के हैंडीक्राफ्ट को, बांस और लकड़ी से बनी चीजों को, एक बड़े विजन के साथ देखा और इसी विजन के कारण, वो एक हैंडीक्रफ्ट से लोगों के जीवन को बदलने का माध्यम बन गईं। आज मारग्रेट जी की यूनिट उसमें 50 से ज्यादा कलाकार काम कर रहे हैं और उन्होंने अपनी मेहनत से दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में, अपने उत्पादों का एक बाजार भी विकसित किया है। मणिपुर से ही एक और उदाहरण सेनापति जिले की रहने वाली चोखोने क्रिचेना जी का है | उनका पूरा परिवार परंपरागत खेती से जुड़ा रहा है | क्रिचेना ने इस पारंपरिक अनुभव को एक और विस्तार दिया | उन्होंने फूलों की खेती को अपना जुनून बनाया |

11:42 AM, 28-Dec-2025

एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन को लेकर किया आगाह

आज मैं एक ऐसे मुद्दे पर बात करना चाहता हूं, जो हम सभी के लिए चिंता का विषय बन गया है | ICMR यानि Indian Council of Medical Research ने हाल ही में एक जारी रिपोर्ट जारी की है | इसमें बताया गया है कि निमोनिया और यूटीआई जैसी कई बीमारियों के खिलाफ एंटीबायोटिक दवाएं कमजोर साबित हो रही हैं। हम सभी के लिए यह बहुत ही चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक इसका एक बड़ा कारण लोगों द्वारा बिना सोचे-समझे एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन है । एंटीबायोटिक ऐसी दवाएं नहीं हैं, जिन्हें यूं ही ले लिया जाए | इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए | आजकल लोग ये मानने लगे हैं कि बस एक गोली ले लो, हर तकलीफ दूर हो जाएगी | यही वजह है कि बीमारियाँ और संक्रमण इन एंटीबायोटिक दवाओं पर भारी पड़ रहे

11:41 AM, 28-Dec-2025

‘हमारा दायित्व है कि हम अपनी विरासत को न भूलें’

साथियो, ये हमारा दायित्व है कि हम अपनी विरासत को ना भूलें। हम आजादी दिलाने वाले नायक-नायिकाओं की महान गाथा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं | आपको याद होगा जब हमारी आजादी के 75 वर्ष हुए थे, तब सरकार ने एक विशेष website तैयार की थी | इसमें एक विभाग ‘Unsung Heroes’ को समर्पित किया गया था | आज भी आप इस website पर visit करके उन महान विभूतियों के बारे में जान सकते हैं जिनकी देश को आजादी दिलाने में बहुत बड़ी भूमिका रही है।

11:39 AM, 28-Dec-2025

स्वतंत्रता सेनानी पार्वती गिरि जी को पीएम मोदी ने किया याद

साथियो, अगले महीने हम देश का 77वाँ गणतंत्र दिवस मनाएंगे। जब भी ऐसे अवसर आते हैं, तो हमारा मन स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता के भाव से भर जाता है | हमारे देश ने आजादी पाने के लिए लंबा संघर्ष किया है | आजादी के आंदोलन में देश के हर हिस्से के लोगों ने अपना योगदान दिया है | लेकिन, दुर्भाग्य से आजादी के अनेकों नायक-नायिकाओं को वो सम्मान नहीं मिला, जो उन्हें मिलना चाहिए था |

ऐसी ही एक स्वतंत्रता सेनानी हैं – ओडिशा की पार्वती गिरि जी | जनवरी 2026 में उनकी जन्म-शताब्दी मनाई जाएगी | उन्होंने 16 वर्ष की आयु में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में हिस्सा लिया था | साथियो, आजादी के आंदोलन के बाद पार्वती गिरि जी ने अपना जीवन समाज सेवा और जनजातीय कल्याण को समर्पित कर दिया था। उन्होंने कई अनाथालयों की स्थापना की | उनका प्रेरक जीवन हर पीढ़ी का मार्गदर्शन करता रहेगा।

11:38 AM, 28-Dec-2025

तमिल भाषा को लेकर बच्चों और युवाओँ में आकर्षण दिख रहा है

फिजी में भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रसार के लिए एक सराहनीय पहल हो रही है। वहां की पीढ़ी को तमिल भाषा से जोड़ने के लिए स्कूल में तमिल दिवस मनाया गया। वहां बच्चों ने तमिल में कविताएं सुनाईं और प्रस्तुतियां दीं। हमारे देश में तमिल भाषा के प्रचार के लिए लगातार काम हो रहा है। हाल ही में काशी में चौथा काशी तमिल संगमम का आयोजन हुआ। इस साल काशी तमिल संगमम में तमिल भाषा सीखने पर खासा जोर दिया गया। इस दौरान काशी के 50 से ज्यादा स्कूलों में विशेष अभियान भी चलाया गया। मुझे खुशी है कि आज देश के दूसरे हिस्सों में भी बच्चों और युवाओं के बीच तमिल भाषा को लेकर नया आकर्षण दिख रहा है – यही भाषा की ताकत है, यही भारत की एकता है ।

11:34 AM, 28-Dec-2025

कश्मीर के बारामूला में मिले बौद्ध स्तूपों के अवशेष

पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर के बारामूला में जेहानपोरा में पुरात्वविदों ने यहां के छोटे टीलों पर ध्यान दिया। इसके बाद इन टीलों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया। ड्रोन और जमीन की मैपिंग की गई। पता चला कि ये टीले प्राकृतिक नहीं हैं, बल्कि किसी पुरानी इमारत के अवशेष हैं। इसके बाद फ्रांस के एक म्यूजियम के आर्काइव में धुंधला सा चित्र मिला, जिनमें बौद्ध धर्म के स्तूप नजर आ रहे थे। कश्मीर के जेहानपोरा का यह परिसर हमें याद दिलाता है कि कश्मीर का अतीत क्या था और उसकी पहचान कितनी समृद्ध थी।

11:21 AM, 28-Dec-2025

परंपरा से जुड़ रहे युवा

साथियों आज का जीवन तकनीक से संचालित हो रहा है और जो बदलाव सदियों में आते थे वे अब कुछ वर्षों में हो जाते हैं। कई बार चिंता जताई जाती है कि रोबोट कहीं इंसानों की जगह न ले लें। मुझे खुशी होती है कि अगली पीढ़ी अपनी संस्कृति की जड़ों को अच्छी तरह से सहेज रही है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ने कुछ वर्षों पहले वहां के छात्रों ने संगीत की जरूरत महसूस हुई। जहां से छोटी म्यूजिक क्लास शुरू हुई। न बड़ा मंच न बड़ा बजट। धीरे-धीरे ये पहल बढ़ती गई और आज हम इसे गीतांजलि आईआईएस के नाम से जानते हैं। यहां हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत है, लोक परंपराएं हैं। छात्र यहां साथ बैठक रियाज करते हैं और छात्रों के परिवार और प्रोफेसर भी यहां जुड़े हैं। जो विदेश चले गए वे भी ऑनलाइन इससे जुड़े हैं। दुनिया के अलग-अलग कोनों से जुड़े भारतीय भी अपनी परंपरा को संभाल रहे हैं। दुबई में भी एक कन्नड़ पाठशाला का जन्म हुआ, जहां बच्चों को कन्नड़ पढ़ना और लिखना सिखाया जाता है। आज इससे एक हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। वाकई कन्नड़ की भाषा हमारा गर्व है।

11:15 AM, 28-Dec-2025

स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन से प्रतिभा दिखा रहे युवा

आज देश के भीतर युवाओँ को प्रतिभा दिखाने के नए नए अवसर मिल रहे हैं। ऐसे कई प्लेटफॉर्म विकसित हो रहे हैं, जहां युवा अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं। ऐसा ही एक मंच है स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन। ये ऐसा मंच है, जहां आइडिया एक्शन में बदलते हैं। इस हैकाथॉन के दौरान 80 से अधिक विभागों की 270 से ज्यादा समस्याओं पर छात्रों ने काम किया। छात्रों ने ऐसे सुझाव दिए, जो रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े थे। ऐसे ही छात्रों ने ट्रैफिक से जुड़े रोचक सुझाव दिए। गांवों में डिजिटल बैंकिंग, साइबर सिक्योरिटी पर सुझाव दिए। कई युवाओं ने कृषि की चुनौतियों पर सुझाव दिए। युवाओ ने कई सटीक सुझाव दिए हैं और इस तरह से हैकाथॉन का समय-समय पर आयोजन होता रहता है। मेरी अपील है कि युवा इन हैकाथॉन में हिस्सा लें।

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