रूस ने रविवार को फिर दोहराया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने किसी भी परमाणु परीक्षण का आदेश नहीं दिया है और देश सामूहिक विनाश के इस हथियार के परीक्षण पर लगाए गए प्रतिबंध का पालन करता रहेगा। यह बयान उस समय आया है, जब कुछ दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु हथियारों के परीक्षण को लेकर बयान दिया था।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूसी टेलीविजन पर कहा, राष्ट्रपति पुतिन कई बार कह चुके हैं कि रूस परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों का पालन कर रहा है और हम ऐसे परीक्षण नहीं करेंगे। लेकिन अगर कोई अन्य देश ऐसा करता है, तो समानता बनाए रखने के लिए हमें भी ऐसा करना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा, अगर वॉशिंगटन वाकई परमाणु हथियारों का परीक्षण करता है, तो रूस को भी उसी तरह जवाब देना होगा। आज की वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में परमाणु समानता सबसे महत्वपूर्ण है।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने 29 अक्तूबर को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा था कि उन्होंने ‘रक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह हमारे परमाणु हथियारों का परीक्षण समान स्तर पर शुरू करे। ट्रंप ने लिखा, अमेरिका के पास किसी भी अन्य देश से ज्यादा परमाणु हथियार हैं। यह मेरे पहले कार्यकाल के दौरान पुराने हथियारों को पूरी तरह से अपडेट करने और नवीनीकरण के साथ संभव हुआ।मैं ऐसा नहीं करना चाहता था, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था! रूस दूसरे स्थान पर है और चीन तीसरे पर, वह पांच वर्षों में बराबरी कर सकता है।
इस बीच, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने राष्ट्रपति पुतिन की उस पेशकश पर टिप्पणी की जिसमें उन्होंने अमेरिका से मौजूदा रणनीतिक हथियार समझौते (स्टार्ट-III) के फरवरी में खत्म होने के बाद भी हथियारों की संख्या स्थिर रखने की अपील की थी। लावरोव ने रविवार को आरआईए नोवोस्ती में प्रकाशित एक साक्षात्कार में कहा कि रूस अमेरिका के जवाब का इंतजार कर रहा है।
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लावरोव ने कहा, नए स्टार्ट समझौते के बाद के दौर में राष्ट्रपति पुतिन की रचनात्मक पहल अपने आप में स्पष्ट है। इसमें कोई छिपा एजेंडा नहीं है और इसे समझना आसान है। इसे लागू करने में किसी विशेष प्रयास की आवश्यकता नहीं है, इसलिए हमें इस पर गहरी चर्चा की जरूरत नहीं लगती।उन्होंने बताया कि अब तक अमेरिका की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।
