आज सुबह आठ बजे ‘चाय पर चर्चा’ आपके शहर मधेपुरा में होगी। अमर उजाला पर कार्यक्रम लाइव टेलीकास्ट होंगे। उसके बाद दोपहर 12 बजे युवाओं से चर्चा की जाएगी। फिर शाम 4 बजे से कार्यक्रम में सभी पार्टी के नेता/प्रत्याशियों, उनके प्रतिनिधि/समर्थकों और आम लोगों से सवाल-जवाब किए जाएंगे। ऐसे में आइये जानते हैं मधेपुरा का इतिहास।
राजनीति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक बिहार की राजनीति तक मधेपुरा जिले की भूमिका हमेशा प्रभावशाली रही है। आजादी के बाद से ही मधेपुरा को समाजवादी राजनीति की भूमि कहा जाता है। ऐसे क्षेत्र में अमर उजाला की टीम बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सत्ता का संग्राम लेकर आई है। चार विधानसभा क्षेत्र वाले मधेपुरा जिले में फिलहाल ‘एनडीए’ और ‘इंडिया’ गठबंधन दो-दो सीटों पर काबिज हैं। लोकसभा सीट की बात करें तो 2019 और 2024 में जदयू के दिनेशचंद्र यादव ने जीत हासिल की है।
समाजवाद की प्रयोगशालामधेपुरा
मधेपुरा से अनेक राष्ट्रीय स्तर के नेता निकले हैं, जिनमें समाजवादी नेता भूपेंद्र नारायण मंडल, बी.पी. मंडल, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल और शिवनंदन प्रसाद मंडल जैसे नाम शामिल हैं। मधेपुरा को समाजवाद की प्रयोगशाला भी कहा जाता है। यहां से लालू प्रसाद यादव, शरद यादव और पप्पू यादव जैसे बड़े नेता सांसद रहे हैं।
मधेपुरा सबसे हॉट सीट
मधेपुरा विधानसभा सीट को सबसे हॉट सीट माना जाता है। पिछले 15 वर्षों से राजद के प्रो. चंद्रशेखर इस सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं और इस बार भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। यहां एक कहावत प्रसिद्ध है रोम पोप का और मधेपुरा गोप का। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि 1952 से अब तक इस सीट से केवल यादव जाति के उम्मीदवार ही विधायक बने हैं। 1952 के विधानसभा चुनाव में पहली बार बी.पी. मंडल विधायक चुने गए थे। इस बार मधेपुरा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना है। जदयू ने पहली बार गैर-यादव महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है, वहीं राजद से टिकट नहीं मिलने पर ई. प्रणव प्रकाश निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
विधानसभा क्षेत्रवार मतदाता विवरण
| विधानसभा | पुरुष मतदाता | महिला मतदाता | प्रथम बार वोटर |
|---|
| आलमनगर | 1,89,634 | 1,70,120 | 8,742 |
| बिहारीगंज | 1,70,356 | 1,56,673 | 7,257 |
| सिंहेश्वर | 1,71,544 | 1,57,606 | 6,582 |
| मधेपुरा | 1,79,747 | 1,64,980 | 6,457 |
चारों सीटों पर पुरुष मतदाताओं की संख्या अधिक है, लेकिन हर बार मतदान में महिलाएं आगे रहती हैं। ग्रामीण इलाकों के अधिकांश पुरुष रोजगार के लिए बाहर रहते हैं। इस बार चारों विधानसभा क्षेत्रों में 29,038 मतदाता पहली बार वोट डालेंगे।
आलमनगर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 3,60,012 मतदाता हैं। यहां से नरेंद्र नारायण यादव 1995 से लगातार विधायक हैं और इस बार भी जदयू के टिकट पर मैदान में हैं। वहीं, इंडी एलायंस ने ई. नवीन कुमार निषाद को दूसरी बार मौका दिया है। 2020 में वे राजद के टिकट पर चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे।
इस बार वे विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के टिकट पर मैदान में हैं। बिहारीगंज विधानसभा से जदयू ने निवर्तमान विधायक निरंजन मेहता को तीसरी बार उम्मीदवार बनाया है। वहीं, दो माह पहले लोजपा छोड़कर राजद में शामिल हुईं पूर्व मंत्री और सांसद रेणु कुमारी कुशवाहा इंडी एलायंस की उम्मीदवार हैं।
ये हैं बड़े मुद्दे
आलमनगर विधानसभा क्षेत्र के दो प्रखंड आलमनगर और चौसा हर साल बाढ़ से प्रभावित रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोसी नदी पर रिंग बांध बना दिया जाए तो बाढ़ की समस्या से स्थायी राहत मिल सकती है। बिहारीगंज और आलमनगर क्षेत्रों में मक्के की खेती बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन इससे जुड़े उद्योगों का अभाव है। किसानों को मजबूरी में अपनी उपज सस्ते दामों पर बेचनी पड़ती है।
कई बार आंदोलन के बावजूद सुधार नहीं हुआ
मधेपुरा में पांच वर्ष पहले जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का उद्घाटन हुआ था, लेकिन आज भी मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता। कई बार आंदोलन के बावजूद सुधार नहीं हुआ है। कोसी के तीनों जिलों का यह सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज अस्पताल है, लेकिन यह सिर्फ रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है। यह मुद्दा इस बार चुनाव में प्रमुखता से उठ रहा है।
विधानसभा – जीते हुए प्रत्याशी – पार्टी
आलमनगर-नरेंद्र नारायण यादव -जदयू
बिहारीगंज -निरंजन कुमार मेहता -जदयू
सिंहेश्वर-चंद्रहास चौपाल- राजद
मधेपुरा- प्रो. चंद्रशेखर -राजद
कार्यक्रम अनुसूची
सुबह 08 बजे -चाय पर चर्चा
स्थान: कॉलेज चौक, मधेपुरा
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दोपहर 01 बजे – युवाओं से चर्चा
स्थान: गौशाला परिसर, मधेपुरा
दोपहर 03 बजे -सत्ता का संग्राम (राजनेताओं से चर्चा)
स्थान: रासबिहारी स्कूल मैदान, मधेपुरा
विशेष कवरेज
सत्ता का संग्राम का विशेष कवरेज आप amarujala.com अमर उजाला के यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर लाइव देख सकेंगे। इस कार्यक्रम से जुड़ा व्यापक जमीनी कवरेज अमर उजाला अखबार में भी पढ़ सकेंगे।
